Get App

US-Iran War: $100 का होगा कच्चा तेल? होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के ऐलान पर एक्सपर्ट ने शुरू किया कैलकुलेशन

US-Iran War impact on Crude Oil: अमेरिका और ईरान के बीच जंग का असर कच्चे तेल पर दिखने लगा है। शनिवार को यह 12% उछल पड़ा था। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर कच्चे तेल की आग और बढ़ा दी है और इसके $100 तक पहुंचने की आशंका जताई जाने लगी है। जानिए कि कच्चे तेल को लेकर यह स्ट्रेट इतना अहम क्यों है और भारत के लिए कितनी चुनौती है?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Mar 01, 2026 पर 8:12 AM
US-Iran War: $100 का होगा कच्चा तेल? होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के ऐलान पर एक्सपर्ट ने शुरू किया कैलकुलेशन
आईजी ग्रुप के एक रिटेल ट्रे़डिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट की कीमत एक समय में प्रति बैरल $75.33 तक पहुंच गई जोकि शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले करीब 12% ऊपर था। (File Photo- Pexels)

US-Iran Tention: ईरान सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया है। ईरान ने यह ऐलान अमेरिकी समर्थन वाले इजरायल के साथ लड़ाई तेज होने के बाद शनिवार को किया। अब आशंका जताई जा रही है कि ईरान के इस फैसले से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट की स्पीड से ऊपर चढ़ सकती हैं क्योंकि दुनिया भर में जितना क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल सप्लाई होता है, उसका पांचवा हिस्सा यानी 20% इसी रास्ते से होता है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आवाजाही को लेकर ईरान अहम गेटकीपर बन जाता है।

कितना चढ़ सकता है कच्चा तेल?

कच्चे तेल की कीमतें पहले ही तेजी से ऊपर भाग चुकी हैं। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक आईजी ग्रुप के एक रिटेल ट्रे़डिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट की कीमत एक समय में प्रति बैरल $75.33 तक पहुंच गई जोकि शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले करीब 12% ऊपर था। मुंबई के एक ब्रोकिंग फर्म इक्विरस ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि यदि ईरान का 33 लाख बैरल प्रतिदिन यानी वैश्विक सप्लाई का लगभग 3% अटकता है तो सिर्फ डायरेक्ट सप्लाई के घाटे के आधार पर कच्चे तेल की कीमत उछलकर $76–$81 प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

मुंबई की एक और ब्रोकरेज फर्म दोलत कैपिटल का अनुमान है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया जाता है, तो कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल $100 तक पहुंच सकती है। भारत की बात करें तो दोलत कैपिटल का अनुमान है कि देश के कच्चे तेल के आयात का करीब 50% और एलपीजी का करीब 60% आयात इसी रास्ते से होता है यानी कि इस रास्ते में कोई भी अड़चन आती है तो तत्काल व्यापक आर्थिक प्रभाव हो सकता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें