अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता (US Iran War Talk) फेल हो गई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को बताया कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत विफल रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट खोलने और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पेंच फंसा है। वहीं बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान के उप संसद अध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि यह स्ट्रेट ईरान के कंट्रोल में है।
ईरान ने कही फीस लेने की बात
ईरान ने कथित तौर पर होर्मुज से हर दिन 10 जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का फैसला लिया है। इसके लिए ईरान ने एक जहाज से दो मिलियन डॉलर की फीस तय की है। ईरान ने यह भी तय किया है कि हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से दस (एक दर्जन से ज्यादा नहीं) जहाजों को निकाला जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब उसकी अमेरिका के साथ सीजफायर समझौते पर बातचीत बेनतीजा रही है।
इस बीत यूएई के सरकार तेल कंपनी एडीएनओसी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने कहा है कि होर्मुज मार्ग पर केवल ईरान का पूरा नियंत्रण नहीं है और वह इसे बंद नहीं कर सकता। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। खासकर तेल और गैस की सप्लाई, खाने-पीने की चीजें और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। सुल्तान अल जाबेर ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसा कदम एक खतरनाक मिसाल बन सकता है, जिसे दुनिया के लिए स्वीकार करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया इस तरह की स्थिति को सहन नहीं कर सकती, इसलिए इसे हर हाल में रोकना जरूरी है।
ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत फेल
मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस दौर की बातचीत में दूसरा पक्ष, यानी अमेरिका, ईरानी प्रतिनिधियों का भरोसा जीतने में सफल नहीं हो पाया। गालिबाफ ने बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने साफ कर दिया था कि ईरान की तरफ से बातचीत के लिए पूरी नीयत और इच्छा है। लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें दूसरे पक्ष पर भरोसा करना मुश्किल लग रहा है।