अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान से बाहर निकल जाएगा। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका इस जंग में लंबे समय तक गहराई से शामिल नहीं रहना चाहता, भले ही अभी वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters को दिए बयान में, देश को संबोधित करने से पहले ट्रंप ने कहा कि सेना हटाने के बाद भी जरूरत पड़ने पर अमेरिका “छोटे-छोटे हमले” करने के लिए वापस आ सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि ईरान की जंग कब खत्म मानी जाएगी, तो उन्होंने कहा, “मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता… लेकिन हम बहुत जल्दी बाहर निकल जाएंगे।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने एक बड़े लक्ष्य को हासिल कर चुका है- अब ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
उन्होंने कहा, “अब उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा, क्योंकि वे अब इसके काबिल नहीं हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अपने तुरंत वाले लक्ष्य पूरे करने के बाद अमेरिका अपनी सेना वापस बुला लेगा।
उन्होंने कहा, “हम निकल जाएंगे और अपने सभी लोगों को साथ ले जाएंगे, और अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से आकर छोटे हमले करेंगे।”
सीमित सैन्य अभियान के संकेत
ट्रंप के इन बयानों से लगता है कि व्हाइट हाउस इस कार्रवाई को एक सीमित सैन्य ऑपरेशन के रूप में दिखाना चाहता है, न कि लंबी चलने वाली जंग के रूप में। “स्पॉट हिट्स” का मतलब है कि अमेरिका लगातार सेना तैनात रखने के बजाय जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में हमला कर सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के आसपास अमेरिकी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं और यह भी पूछा जा रहा है कि अमेरिका आखिर कितने समय तक इस जंग में सीधे तौर पर शामिल रहेगा।
ट्रंप ने NATO की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के मामले में NATO ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जिससे वह नाराज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अमेरिका को NATO से बाहर निकालने पर “गंभीरता से विचार” कर रहे हैं।
यह बयान खासकर यूरोप के देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि NATO को वहां की सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है।
ट्रंप जल्द ही देश को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें वह ईरान को लेकर अमेरिका की आगे की रणनीति, सैन्य योजना और बाहर निकलने के तरीके (exit plan) के बारे में विस्तार से बता सकते हैं।
फिलहाल व्हाइट हाउस का संदेश यही है कि यह मिशन छोटा, तेज और जरूरत पड़ने पर दोबारा शुरू किया जा सकने वाला है। यानी अमेरिका लंबे समय तक जंग में फंसना नहीं चाहता, लेकिन अगर ईरान फिर से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश करता है, तो भविष्य में फिर से हमले करने का विकल्प खुला रखा जाएगा।