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Venezuela Crisis: वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का कंट्रोल! भारत को हो सकता है $1 बिलियन का लाभ, जानें कैसे

US Attack On Venezuela: एक्सपर्ट की मानें तो वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी कंट्रोल या फिर उसके रीस्ट्रक्चरिंग से भारत को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। भारत ने रविवार (4 जनवरी) को अमेरिकी सैन्य अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़े जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 04, 2026 पर 5:51 PM
Venezuela Crisis: वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का कंट्रोल! भारत को हो सकता है $1 बिलियन का लाभ, जानें कैसे
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US Attack On Venezuela: एनालिस्ट्स और इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का कंट्रोल या रीस्ट्रक्चरिंग से भारत को फायदा हो सकता है। एनालिस्ट्स ने बताया कि इस घटनाक्रम के चलते काफी समय से लंबित भारत के लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर के बकाए की वसूली हो सकती है। साथ ही प्रतिबंधों से प्रभावित वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों द्वारा संचालित तेल सेक्टर से कच्चे तेल का प्रोडक्शन भी बढ़ सकता है। वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हमला कर अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो समेत उनकी पत्नी को लेकर न्यूयॉर्क चला गया है।

भारत एक समय वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल का प्रमुख इंपोर्टर देश था। अपने चरम काल के दौरान भारत वेनेजुएला से हर दिन 4,00,000 बैरल से अधिक का आयात करता था। हालांकि, 2020 में अमेरिकी प्रतिबंधों और कम्प्लायंस जोखिमों के कारण यह आयात बाधित हो गया था

भारत की प्रमुख विदेशी तेल खोज और उत्पादन कंपनी, ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र का संयुक्त रूप से ऑपरेट करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आवश्यक टेक्नोलॉजी, उपकरण और सेवाओं तक पहुंच बाधित होने से वहां उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इसके बाद व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार लगभग फंस गए।

इतने फायदेमंद भंडार का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। वेनेजुएला सरकार ने इस प्रोजेक्ट में OVL की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर 2014 तक के 53.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का डिविडेंड अभी तक नहीं चुकाया है। इसके बाद की अवधि के लिए भी लगभग समान राशि बकाया है। लेकिन ऑडिट की अनुमति न मिलने के कारण इन दावों का निपटारा रुका हुआ है।

प्रोडक्शन में होगा इजाफा

एनालिस्ट्स के अनुसार, यदि अमेरिका वहां के तेल भंडार को अपने कंट्रोल में लेता है, तो प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। इसके बाद ओवीएल गुजरात और अन्य क्षेत्रों से रिग एवं अन्य इक्विपमेंट भेजकर प्रोडक्शन बढ़ा सकती है। इस समय यह प्रोडक्शन घटकर मात्र 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है।

अधिकारियों का अनुमान है कि यदि एडवांस्ड इक्विपमेंट और अतिरिक्त तेल कुओं का उपयोग किया जाए, तो प्रोडक्शन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन हो सकता है। इसके लिए जरूरी रिग्स पहले से ही ONGC के पास उपलब्ध हैं। अमेरिकी कंट्रोल का अर्थ यह भी है कि ग्लोबल मार्केट में वेनेजुएला से एक्सपोर्ट जल्द ही बहाल हो सकता है। इससे ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) को अपने पुराने बकाए की वसूली में सहायता मिलेगी।

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