एक तस्वीर से घुटनों पर आएं नेतन्याहू! इजरायली सैनिक की वायरल हुई ऐसी फोटो की दुनियाभर में मच गया बवाल

Jesus Christ Statue: इजरायली सेना ने स्वीकार किया कि यह तस्वीर असली है। वायरल हुए फोटो में एक इजरायली सैनिक ईसा मसीह की मूर्ति को हथौड़े से तोड़ता नजर आ रहा है जो दक्षिण लेबनान के देबल गांव के पास का बताया गया। IDF ने कहा कि दोषी सैनिक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है और 'उचित कार्रवाई' की जाएगी

अपडेटेड Apr 20, 2026 पर 5:04 PM
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इस घटना के बाद इजरायली सेना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है

Israeli Soldier Viral Photo: दक्षिणी लेबनान से आई एक तस्वीर ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस फोटो में एक इजरायली सैनिक ईसा मसीह की मूर्ति को हथौड़े से तोड़ता नजर आ रहा है। इस घटना के बाद इजरायली सेना को न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि खुद इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस पर सफाई देनी पड़ी है।

50 लाख से ज्यादा बार देखी गई तस्वीर

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 'X' पर यह तस्वीर वायरल हो गई और इसे कुछ ही घंटों में 50 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इजरायली सेना ने सोमवार को स्वीकार किया कि यह तस्वीर असली है। इसे दक्षिण लेबनान के देबल गांव के पास का बताया गया। IDF ने कहा कि प्रारंभिक समीक्षा के बाद दोषी सैनिक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है और 'उचित कार्रवाई' की जाएगी।


क्या सैनिक को ईसा मसीह से खतरा महसूस हुआ?

इस कृत्य पर फिलीस्तीनी मूल के इजरायली सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, 'अब हम पुलिस प्रवक्ता के उस बयान का इंतजार करेंगे जिसमें कहा जाएगा कि सैनिक को ईसा मसीह से अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा था।अहमद टिबी ने कहा कि जो लोग गाजा में मस्जिदों और चर्चों को नष्ट करते हैं और यरुशलम में पादरियों पर थूकते हैं, वे ऐसी हरकत करने से कभी नहीं हिचकिचाएंगे।

'मैं स्तब्ध और दुखी हूं': नेतन्याहू

बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। नेतन्याहू ने कहा, 'इजराइल एक यहूदी राष्ट्र के रूप में सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान का पालन करता है। दक्षिण लेबनान में एक सैनिक द्वारा कैथोलिक प्रतीक को नुकसान पहुँचाने की खबर से मैं स्तब्ध हूं।' नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि जहां मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में ईसाई आबादी घट रही है, वहीं इजराइल एकमात्र ऐसा देश है जहाँ ईसाई फल-फूल रहे हैं और उनकी आबादी बढ़ रही है।

धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों का आंकड़ा

वैसे यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने बताया कि इजरायली सेटलर्स ने वेस्ट बैंक में 45 मस्जिदों में तोड़फोड़ की। 'रिलिजियस फ्रीडम डेटा सेंटर' के अनुसार, जनवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की 201 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें पादरियों पर थूकना, गाली-गलौज और चर्चों में तोड़फोड़ शामिल है।

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