US On Russian Oil: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिका ने भारत को लेकर अपने रुख में बड़ी ढील दी है। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति क्यों दी गई। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भारत को एक 'गुड एक्टर' बताते हुए कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की मंजूरी के बाद लिया गया है।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने फॉक्स न्यूज से कहा, 'भारतीयों ने बहुत अच्छा व्यवहार किया। जब हमने कहा तो उन्होंने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, अब हम उन्हें सप्लाई बनाए रखने के लिए इसकी अनुमति दे रहे हैं।'
क्यों मिली भारत को 'अस्थायी' छूट?
व्हाइट हाउस के अनुसार, भारत को यह छूट देने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
पुराना सहयोग: कैरोलिन लेविट ने कहा, 'भारत ने अतीत में हमारा सहयोग किया है और प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था। उनके इस अच्छे व्यवहार को देखते हुए हम उन्हें वर्तमान संकट में रियायत दे रहे हैं।'
सप्लाई गैप को भरना: ईरान के साथ युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल की कमी हो गई है। इस 'सप्लाई गैप' को भरने के लिए भारत को रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी गई है।
समुद्र में मौजूद कार्गो: व्हाइट हाउस का तर्क है कि बहुत सारा तेल पहले ही जहाजों पर लोड होकर समुद्र में निकल चुका था। ऐसे में उसे भारत पहुंचने देना रूस के लिए कोई नया बड़ा आर्थिक लाभ नहीं है।
टैरिफ विवाद और समझौते की ओर कदम
रूसी तेल को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहले काफी तनाव था, जो अब कम होता दिख रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले भारत पर रूसी तेल आयात के कारण 50% तक टैरिफ लगा दिए थे और भारत पर 'यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने' का आरोप लगाया था। लेकिन हाल ही में दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हुआ, जिसके बाद भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया।
अमेरिका का कहना है कि यह कटौती इस उम्मीद में की गई है कि भारत धीरे-धीरे रूसी तेल की खरीद कम करेगा। हालांकि, भारत ने अपनी 140 करोड़ की आबादी की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसी किसी समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच होर्मुज की नाकेबंदी का डर
यह पूरा घटनाक्रम ईरान द्वारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद करने की धमकी के बीच हो रहा है। दुनिया का 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो एशियाई देशों, विशेषकर भारत के लिए ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
सरकार का LPG की घरेलू सप्लाई पर जोर
घरेलू स्तर पर तेल और गैस की कमी को रोकने के लिए भारत सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे LPG का उत्पादन बढ़ाएं। सरकार घरेलू रसोई गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए गैर-जरूरी और कमर्शियल कार्यों में गैस के इस्तेमाल की समीक्षा कर रही है। गैस की कमी की रिपोर्टों के बीच सरकार ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है ताकि आम जनता को होने वाली दिक्कतों को तुरंत दूर किया जा सके।