India China Trade: ट्रंप के टैरिफ से करीब आएंगे भारत और चीन? झुकने को भी तैयार है ड्रैगन

ट्रंप के टैरिफ से भारत और चीन के व्यापारिक संबंध बढ़ सकते हैं, क्योंकि दोनों देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों से खतरा है। हालांकि, सीमा विवाद, चीन विरोधी भावनाएं और प्रतिस्पर्धा बाधाएं बनी रह सकती हैं।

अपडेटेड Apr 02, 2025 पर 8:36 PM
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चीन का कहना है कि भारत से आयात बढ़ाने और व्यापार सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है।

India China Trade:  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से ग्लोबल ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका के कई प्रमुख व्यापारिक साझीकार जवाबी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कुछ देशों ने नरम रुख अख्तियार करते हुए बातचीत की अपील की है। ट्रंप के निशाने पर भारत और चीन भी है। ट्रंप ने भारत को 'टैरिफ अब्यूजर' भी करार दिया है। चीन पर भी ट्रंप का पहले ही कार्यकाल से सख्त रुख रहा है।

इससे संभावना जताई जा रही है कि भारत और चीन अपनी प्रतिद्वंद्वता को किनारे रखकर साझीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे सकते हैं, ताकि ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के असर को कम किया जा सके। हालांकि, यह नजदीकी सिर्फ व्यापारिक मामलों में होने की उम्मीद है।

चीन ने ट्रंप के टैरिफ पर क्या कहा?


चीन का कहना है कि अमेरिका को जल्द ही 'बातचीत और सहयोग के सही रास्ते' पर लौटना चाहिए। लेकिन अगर अमेरिका टैरिफ युद्ध, ट्रेड वॉर या किसी भी अन्य तरह के युद्ध की ओर बढ़ता है, तो चीन अंत तक लड़ने के लिए तैयार है।

भारत से अधिक सामान खरीदने को तैयार चीन

चीन ने ट्रंप की टैरिफ घोषणा से ठीक पहले कहा कि वह भारत से आयात बढ़ाने और व्यापार सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है। बीजिंग में भारत के लिए चीन के राजदूत झू फेइहोंग ने भारतीय कंपनियों से चीन के विकास के 'लाभ साझा; करने की अपील की।

उन्होंने चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' से कहा, 'हम भारत के व्यावहारिक सहयोग मजबूत करना चाहते हैं। हम भारतीय बाजार से अधिक उत्पाद खरीदने के लिए भी तैयार हैं।'

भारत-चीन का व्यापारिक रिश्ता कैसा है?

चीन 2010 के दशक में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया था। हालांकि, 2020-21 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत ने चीनी निवेश पर कई प्रतिबंध लगाए और 200 से अधिक चाइनीज ऐप्स को बैन भी किया। उसने बीजिंग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की भी सख्ती से जांच शुरू कर दी।

हालांकि, राजनीतिक तनाव के बावजूद 2022 में भारत और चीन के बीच व्यापार रिकॉर्ड 135.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। 2023-24 में यह 101.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर रहा। हालांकि, भारत का व्यापार घाटा 2023 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, क्योंकि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, दवा और केमिकल के लिए चीन पर भारी निर्भरता बनी हुई है।

ट्रंप के टैरिफ से भारत-चीन को क्या खतरा है?

  • भारत और चीन को अमेरिकी टैरिफ से गंभीर आर्थिक खतरा है, क्योंकि दोनों ही प्रमुख निर्यातक देश हैं।
  • इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ सकता है, हालांकि यह पूर्ण गठबंधन में नहीं बदलेगा।
  • दोनों देश अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। इससे भारत-चीन व्यापार में वृद्धि की संभावना है।
  • BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मौजूदा क्षेत्रीय आर्थिक मंच दोनों देशों को सहयोग बढ़ाने के अवसर देते हैं।

किन क्षेत्रों में हो सकता है सहयोग?

अमेरिकी टैरिफ के कारण, चीन भारत को एक वैकल्पिक उत्पादन केंद्र के रूप में देख रहा है। चीनी कंपनियां भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और दवा क्षेत्र में निवेश कर रही हैं ताकि अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों से बचा जा सके।

अमेरिका ने चीन की सेमीकंडक्टर कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे बाजार में एक खालीपन आ गया है। भारत अपनी घरेलू चिप निर्माण क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे चीनी तकनीकी कंपनियां भारत के साथ साझेदारी कर सकती हैं। भारत बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है, जबकि चीन नई सप्लाई चेन की तलाश में है। इससे भारत के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में चीनी निवेश बढ़ रहा है।

भारत-चीन का साथ आना आसान भी नहीं

  • भारत और चीन के बीच लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को लेकर ऐतिहासिक सीमा विवाद हैं, जो व्यापार सहयोग को सीमित कर सकते हैं।
  • 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत की जनता में चीन विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं। सरकार ने चीनी निवेश पर सख्ती भी बढ़ा दी थी।
  • भारत और चीन कई क्षेत्रों जैसे टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम और फार्मा में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। इसलिए सहयोग को संतुलित रखना जरूरी होगा, ताकि कोई एक देश दूसरे पर हावी न हो जाए।

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