चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले महीने 21 मई से 5 जून तक अचानक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के शीर्ष नेतृत्व में कुछ बड़े आंतरिक बदलाव चल रहे हैं। हालांकि, खुफिया सूत्रों का कहना है कि शी का इस तरह गायब होना नई बात नहीं है, क्योंकि चीन में बड़े नेताओं को साइडलाइन करने की परंपरा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी तीन बड़े नेताओं को सिर्फ नाम के पदों पर बैठाकर हटा दिया गया था। अब भी असली सत्ता CCP के कुछ पुराने गुटों के हाथ में है। जनरल झांग योक्शिया, जो कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पहले उपाध्यक्ष हैं, फिलहाल सबसे ताकतवर माने जा रहे हैं। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ गुट का समर्थन हासिल है।
खुफिया एजेंसियों ने इस बात की भी ओर इशारा किया है कि पिछले कुछ समय से सरकारी मीडिया में "शी जिनपिंग थॉट" जैसे शब्दों का इस्तेमाल न के बराबर हो गया है। वहीं कई पुराने वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और बयानबाजी फिर से सामने आने लगी है। यह इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदल रहा है।
चीन की अर्थव्यवस्था भी इन दिनों बुरी हालत में है। युवाओं में बेरोजगारी 15% से ऊपर है और रियल एस्टेट सेक्टर लगातार ठप पड़ा है। चीन की महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर योजनाएं भी विफल साबित हो रही हैं। इन आर्थिक संकटों के बीच अंदरूनी राजनीति और अस्थिरता और गहरी हो रही है।
भारत से जुड़ी बड़ी चिंता यह है कि जब भी चीन के भीतर उथल-पुथल होती है, तो वह अपनी आंतरिक समस्याओं का ध्यान हटाने के लिए बाहरी मोर्चे पर तनाव बढ़ाता है, खासकर भारत के खिलाफ।
खुफिया सूत्र बताते हैं कि 2024 के अंत से अब तक चीन की PLA की वेस्टर्न थिएटर कमांड में लगातार बदलाव किए गए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि अरुणाचल प्रदेश या लद्दाख में चीन कोई उकसावे वाली कार्रवाई कर सकता है, ताकि सेना के नए अधिकारी अपनी 'निष्ठा' साबित कर सकें या घरेलू समस्याओं से ध्यान भटका सकें।
यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2012 में बो शिलाई राजनीतिक संकट के दौरान भी चीन ने दक्षिण चीन सागर में गतिविधियां तेज की थीं। 2020 में महामारी के समय भी लद्दाख में घुसपैठ की घटनाएं इसी रणनीति का हिस्सा थीं। 2014 में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के दौरान भी सेना और स्थानीय ताकतों में अस्थिरता पैदा हुई थी, जिसे बाहर के तनावों से संभालने की कोशिश की गई थी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि चीन अब भारत के खिलाफ साइबर अटैक बढ़ा सकता है और डिज़इन्फॉर्मेशन यानी फर्जी सूचनाओं के ज़रिए भारत के अंदरुनी मुद्दों को निशाना बना सकता है — जैसा कि कोविड काल में देखा गया था। साथ ही चीन यूएनएससी में भारत की पहलें रोक सकता है और हिंद महासागर में अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा सकता है, ताकत दिखाने के मकसद से।