Interim Budget 2024: दिख सकती है मोदी की गारंटी की छाप; मिडिल क्लास, किसान समेत मतदाताओं के बड़े वर्ग को साधने की हो सकती है कोशिश
Interim Budget 2024: सरकार ने राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2025-26 तक 4.5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है। अप्रैल-मई में आम चुनाव होने की वजह से फरवरी माह में अंतरिम बजट पेश किया जा रहा है। 2019 के अंतरिम बजट को उस वक्त वित्त मंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था
Interim Budget 2024: अगर जरूरत हुई तो सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लेकर थोड़ी रियायत भी ले सकती है।
Interim Budget 2024: संसद में 1 फरवरी को बजट 2024 पेश किया जाएगा। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) का छठा बजट है। अप्रैल-मई में आम चुनाव होने की वजह से फरवरी माह में अंतरिम बजट पेश किया जा रहा है। इस बजट में मोदी की गारंटी (Modi's Guarantee) की छाप रहने की संभावना है। मध्यम वर्ग (Middle Class), किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों समेत मतदाताओं के बड़े वर्ग को आकर्षित करने के लिए लोकलुभावन योजनाएं पेश की जा सकती हैं।
यह बात पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग (Subhash Chandra Garg) ने कही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस गारंटी को पूरा करने के लिए अगर जरूरत हुई, तो राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को लेकर थोड़ी रियायत भी ले सकती है।
2019 के अंतरिम बजट जैसा हो सकता है बजट 2024
गर्ग ने PTI-भाषा से कहा, ‘वास्तव में लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाला अंतरिम बजट सत्ता में मौजूद पार्टी के लिए मुफ्त एवं लोकलुभावन योजनाओं के जरिये मतदाताओं को आकर्षित करने का एक मौका होता है। वर्ष 2019 में आम चुनाव से पहले पेश अंतरिम बजट में भी हम ऐसा होते हुए देख चुके हैं। सरकार ने 2019 में मध्यम वर्ग, किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लक्षित किया था। कुल मिलाकर ये लगभग 75 करोड़ मतदाता हैं। ऐसी संभावना है कि सरकार इस बार भी इन मतदाताओं का खास ध्यान रखेगी।’
2019 के अंतरिम बजट को उस वक्त वित्त मंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था। उस बजट में मध्यम वर्ग के लिए इनकम टैक्स रिबेट को बढ़ाया गया था, जिससे 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम, टैक्स फ्री हो गई। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 12 करोड़ किसानों को सालाना 6000 रुपये दिए जाने की भी घोषणा हुई थी। इसके अलावा पीएम श्रम योगी मानधन स्कीम से जुड़े असंगठित क्षेत्र के 50 करोड़ श्रमिकों के लिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन में सरकारी योगदान का भी प्रस्ताव किया गया था। गर्ग ने कहा कि कुल मिलाकर मोदी की गारंटी की छाप इस बार के अंतरिम बजट में भी देखने को मिल सकती है।
क्या है मोदी गारंटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कई घोषणाएं की थीं। इनमें अन्य बातों के अलावा 450 रुपये में एलपीजी गैस सिलेंडर, गरीब महिलाओं को 1250 रुपये का नकद, 21 साल की उम्र तक की गरीब लड़कियों को दो लाख रुपये आदि घोषणाएं शामिल हैं। इन्हें मोदी की गारंटी नाम दिया गया।
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को साध सकती हैं वित्त मंत्री
पूर्व वित्त सचिव ने कहा, ‘असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी और वेतन कटौती को लेकर काफी संकट है। केंद्र सरकार के पास असंगठित क्षेत्र के 30 करोड़ श्रमिकों का आंकड़ा है। वित्त मंत्री इन श्रमिकों को आकर्षित करने के लिए कुछ घोषणाएं कर सकती हैं। उन्हें सालाना कुछ नकद राशि देने की घोषणा की जा सकती है।’
बिहार सरकार ने हाल ही में 6000 रुपये प्रति माह से कम आय वाले 94 लाख गरीब परिवारों को दो लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसको देखते हुए अंतरिम बजट में इस तबके को प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता दिए जाने की संभावना है।
..तो बिगड़ नहीं जाएगी राजकोषीय घाटे की स्थिति
इन घोषणाओं से राजकोषीय घाटे की स्थिति पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल पर गर्ग ने कहा, ‘सरकार ने राजकोषीय घाटा 17.9 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा है। यह अनुमान जीडीपी के 301.8 लाख करोड़ रुपये रहने के अनुमान पर आधारित था। 2023-24 के पहले एडवांस एस्टिमेट में जीडीपी 296.6 लाख करोड़ रुपये रहने पर यह 6 प्रतिशत यानि 17.8 लाख करोड़ रुपये बनता है। यह बजट में तय लक्ष्य के लगभग बराबर है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2025-26 तक 4.5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है। यानि वर्तमान के 6 प्रतिशत की तुलना में इसमें 1.5 प्रतिशत की कमी लानी होगी।
गर्ग ने इस बारे में और बताते हुए कहा, ‘सरकार बाजार मूल्य पर 10.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि के साथ 2024-25 में जीडीपी का अनुमान 327.7 लाख करोड़ रुपये रख सकती है। ऐसे में राजकोषीय घाटे में 0.75 प्रतिशत कटौती करने का मतलब है कि खर्च में 2.5 लाख करोड़ रुपये की कमी करनी होगी। यह मुश्किल लगता है। दूसरी तरफ सरकार की लोकलुभावन योजनाओं पर भी खर्च होने की संभावना है।’
उन्होंने आगे कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मोदी की गारंटी पर होने वाले खर्च को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा या फिर टैक्स रेवेन्यू, नॉन टैक्स रेवेन्यू और विनिवेश प्राप्तियों के अनुमान को बढ़ाया जाएगा। सबसे अधिक संभावना यह है कि अंतरिम बजट आगामी लोकसभा चुनावों की जरूरतों के अनुरूप होगा। राजकोषीय मजबूती के लिए इंतजार किया जा सकता है।
रेवेन्यू की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर गर्ग ने कहा कि इनकम टैक्स कलेक्शन, बजट अनुमान से कहीं बेहतर रहेगा। जीएसटी लक्ष्य के अनुरूप है। सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क का प्रदर्शन जरूर खराब रहा है। लेकिन आरबीआई और पीएसयू से अधिक लाभांश आने के कारण नॉन टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से अधिक होगा। विनिवेश आय ने काफी निराश किया है। कुल मिलाकर अतिरिक्त खर्च के लिए नॉन डेट रिसीप्ट अच्छी स्थिति में रहने की संभावना है।