Deepfake को लेकर सरकार गंभीर, बंद हो सकते हैं फेसबुक-एक्स

डीपफेक और अन्य प्रतिबंधित कंटेट के सर्कुलेशन को लेकर सरकार सख्त हो गई है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने 24 नवंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी है। डीपफेक और बाकी प्रतिबंधित कंटेंट से जुड़े नियमों के बार-बार उल्लंघन पर मिनिस्ट्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में अस्थायी तौर पर बैन करने की चेतावनी दी है

अपडेटेड Nov 25, 2023 पर 9:45 AM
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यूजर्स डीपफेक को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगें। मंत्रालय ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में यूजर्स की सहायता भी कर सकता है।

डीपफेक और अन्य प्रतिबंधित कंटेट के सर्कुलेशन को लेकर सरकार सख्त हो गई है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने 24 नवंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी है। मनीकंट्रोल को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक डीपफेक और बाकी प्रतिबंधित कंटेंट से जुड़े नियमों के बार-बार उल्लंघन पर मिनिस्ट्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में अस्थायी तौर पर बैन करने की चेतावनी दी है। इस बैठक की अगुवाई मिनिस्टर ऑफ स्टेट राजीव चंद्रशेखर ने की और इसमें फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा, स्नैप, शेयरचैट, टेलीग्राम, रिलायंस जियो, कू, सैमसंग और एपल समेत और कई कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Deepfake को लेकर क्या है कानून

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा, पब्लिक ऑर्डर या अन्य वजहों से जुड़ी चिताओं को लेकर किसी कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है। बैठक के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया किया कि डीपफेक भी आईटी रूल्स के Rule 3 (1) (b) (v) के तहत आता है यानी कि डीपफेक में कार्रवाई के लिए अलग से कार्रवाई की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि AI के जरिए तैयार किया गया कंटेंट जैसे कि डीपफेक इसके तहत आता है। इस बैठक के एक दिन पहले केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सरकार ने डीपफेक से निपटने के लिए एक अलग नियम पर काम करना शुरू करेगी।

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शेयर तो यूजर ने किया लेकिन इस वजह में फंस सकती है कंपनी भी

बैठक के दौरान कंपनियों को यह भी बताया गया कि अगर वे आईटी रूल्स का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें जिस नियम के तहत राहत मिलती है, वह नहीं मिलेगी। आईटी एक्ट, 2000 के सेफ हार्बर प्रोविजन के तहत इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को यूजर कंटेंट के खिलाफ किसी कानूनी मसले में राहत मिलती है। मनीकंट्रोल को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह राहत तभी मिलेगी, जब वे इस कंटेंट को ओरिजिन यानी पहली बार कहां से कंटेंट पब्लिश हुआ, इसकी जानकारी मुहैया कराएंगे। आईटी रूल्स के Rule 4(2) के तहत ओरिजिन पता लगाने का प्रावधान है लेकिन इस रूल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में वाट्सऐप ने चुनौती दी हुई है।

7 दिनों का मिलेगा समय

केंद्रीय मंत्री चंद्रेशखर के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को नियमों के पालन के लिए सात दिनों का समय दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि आईटी रूल्स के रूल 7 के तहत एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो एक सिस्टम बनाएगा। इसके तहत यूजर्स डीपफेक को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगें। मंत्रालय ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में यूजर्स की सहायता भी कर सकता है।

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