नौकरी छोड़ गांव में शुरू किया भेड़पालन, 35 भेड़ों से हो रही तगड़ी कमाई

Animal Husbandry Rampur: रामपुर के पप्पू ने पुश्तैनी भेड़पालन को मजबूत रोजगार में बदल दिया है। दादा और पिता के बाद अब वह इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने 6 भेड़ों से शुरुआत की और आज 35 देशी भेड़ें हैं। सही देखभाल, चारा-पानी से उत्पादन बढ़ता है, भेड़ का घी 10 हजार रुपये किलो तक बिकता है

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 12:19 PM
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Animal Husbandry Rampur: मौसम बदलने पर भेड़ों की खास देखभाल जरूरी होती है

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के रहने वाले पप्पू ने भेड़पालन को केवल पुश्तैनी काम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया है। उनके परिवार में यह काम पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज पप्पू उसी परंपरा को नए नजरिए के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि भेड़पालन में मेहनत जरूर है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी के अधीन काम नहीं करना पड़ता। अपने समय और जरूरत के हिसाब से काम करने की आज़ादी मिलती है, जो नौकरी में संभव नहीं हो पाती। पप्पू मानते हैं कि अगर लगन और सही तरीके से इस काम को किया जाए तो यह स्थायी कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है।

गांव के माहौल में रहकर, कम संसाधनों के साथ शुरू होने वाला यह काम धीरे-धीरे बेहतर आमदनी देने लगता है। यही वजह है कि पप्पू भेड़पालन को भविष्य के लिए भी सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मानते हैं।

6 भेड़ों से शुरू हुआ सफर


पप्पू बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में सिर्फ 6 भेड़ों से काम शुरू किया था। नियमित मेहनत, सही देखभाल और खानपान पर ध्यान देने से उनका झुंड धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज उनके पास 35 देशी भेड़ें हैं। उनका कहना है कि समय पर चारा और साफ पानी मिले तो भेड़ों की सेहत अच्छी रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है।

दूध, घी और बच्चों से कमाई

भेड़पालन से पप्पू को कई तरीकों से आमदनी होती है। भेड़ों के दूध से घी बनाया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। देसी भेड़ का घी 10 हजार रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। इसके अलावा भेड़ हर छह महीने में बच्चा देती है, जिससे पशुओं की संख्या बढ़ती रहती है। साल में करीब 30 बच्चे तैयार हो जाते हैं। एक भेड़ की कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक मिल जाती है, जिससे लाखों का मुनाफा हो जाता है।

चारे पर कम खर्च, मुनाफा ज्यादा

पप्पू बताते हैं कि साल में एक बार बड़ी भेड़ों को बेचकर भी अच्छी कमाई हो जाती है। भेड़ों की कीमत उनके वजन और नस्ल के हिसाब से तय होती है। रोज सुबह वह भेड़ों को खुले मैदान और खेतों में चराने ले जाते हैं, जहां वे हरी घास खा लेती हैं। इससे चारे का खर्च काफी कम हो जाता है। शाम को भेड़ों को घर लाकर उनकी देखभाल की जाती है।

गांव के युवाओं के लिए अच्छा विकल्प

मौसम बदलने पर भेड़ों की खास देखभाल जरूरी होती है, क्योंकि इस समय बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पप्पू का मानना है कि अगर सही तरीके से भेड़पालन किया जाए तो इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। गांव के युवाओं के लिए यह एक बेहतर रोजगार विकल्प है, जिसमें ज्यादा बड़ी पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

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