Agri Tips: गर्मियों में आसमान छू रही मांग, इस सब्जी की खेती बन रही किसानों के लिए सोने की खान

Agri Tips: आज खेती में सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि बाजार की समझ भी जरूरी हो गई है। बाराबंकी के किसान नरेंद्र कुमार ने पारंपरिक खेती छोड़कर खास तोरई की खेती शुरू की, जो कम लागत और कम पानी में ज्यादा उत्पादन देती है। वह एक बीघे में करीब 60 हजार रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं

अपडेटेड Mar 29, 2026 पर 1:11 PM
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Agri Tips: इसकी खेती करना काफी आसान है और ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती।

आज के समय में खेती सिर्फ परंपरागत तरीकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नई तकनीक और फसल चयन से किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ रही है। बाराबंकी जिले के किसान भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और सीजनल सब्जियों की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। खासकर ‘अरो तोरई’ जैसी नकदी फसल कम लागत और ज्यादा उत्पादन के कारण किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है।

गर्मियों में जब दूसरी सब्जियों की सप्लाई कम होती है, तब इसकी मांग तेजी से बढ़ती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। यही वजह है कि किसान कम समय में ज्यादा कमाई के लिए इसकी खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और पारंपरिक खेती से हटकर नए विकल्प अपना रहे हैं।

युवा किसान नरेंद्र की सफलता


बाराबंकी के बंकी ब्लॉक के फतहाबाद गांव के किसान नरेंद्र कुमार कई सालों से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने ट्रायल के तौर पर अरो तोरई लगाई थी, लेकिन इसमें उन्हें शानदार मुनाफा हुआ। अब वो करीब 1 बीघे में इसकी खेती कर रहे हैं और एक सीजन में 50 से 60 हजार रुपये तक कमा रहे हैं। उनकी सफलता देखकर आसपास के किसान भी इस खेती को अपनाने लगे हैं।

कम खर्च में ज्यादा मुनाफा

नरेंद्र लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि बाजार में अरो तोरई की मांग काफी ज्यादा है और ये 70 से 80 रुपये किलो तक बिक रही है। एक बीघे में इसकी खेती पर करीब 4 से 5 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है। स्वाद में बेहतर होने के कारण ग्राहक भी इसे ज्यादा पसंद करते हैं।

खेती का आसान तरीका

इसकी खेती करना काफी आसान है और ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसमें गोबर की खाद डाली जाती है। फिर क्यारियां बनाकर बीज बोए जाते हैं। 10-12 दिन में पौधे निकल आते हैं और पहली सिंचाई की जाती है। करीब 40-50 दिनों में फसल तैयार हो जाती है, जिसे किसान आसानी से बेच सकते हैं।

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