Cucumber Cultivation Tips: खीरे की खेती में मुनाफा और खतरा दोनों, जानें बचाव का तरीका

Cucumber Cultivation Tips: इस सीजन में कई किसान खीरे की खेती कर रहे हैं और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी है। लेकिन एक मक्खी खीरे की फसल को जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है और पूरी बेल सुखा सकती है। जानें इस खतरनाक मक्खी से फसल को बचाने का असरदार इलाज

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 10:21 AM
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Cucumber Cultivation Tips: अगर समय पर नियंत्रण न किया गया, तो पौधा 5–7 दिनों में मुरझाने लगता है

गर्मियों के मौसम में देश के कई राज्यों में खीरे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, क्योंकि इस समय खीरे का उत्पादन और बाजार में मांग दोनों अधिक रहते हैं। हालांकि, इस फसल को इन दिनों सोना मक्खी (पीली मक्खी) का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसान भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। सोना मक्खी पत्तियों, फूलों और छोटे फलों पर डंक मारकर पौधों को कमजोर कर देती है, जिससे फसल का उत्पादन तुरंत प्रभावित होता है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

इस कारण किसानों के लिए खेत में रोजाना निगरानी और सावधानी बरतना जरूरी हो गया है। नियमित देखभाल और उचित कीटनाशकों या जैविक उपायों का इस्तेमाल ही फसल को सुरक्षित रखने और मेहनत के अच्छे परिणाम सुनिश्चित करने का तरीका है।

डंक मारते ही पौधा मुरझाने लगे


सोना मक्खी पत्तियों, फूलों और छोटे फलों पर डंक मारती है। जहां डंक लगता है, वहां पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है। अगर समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। सुबह और शाम के समय मक्खी का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

नियमित देखभाल और निगरानी जरूरी

शिवपुरी के किसान हरीराम सिंह कुशवाहा बताते हैं कि खीरे की फसल में मुनाफा अच्छा है, लेकिन इसके लिए नियमित देखभाल और समय-समय पर छिड़काव जरूरी है। उनके अनुसार एक बीघा जमीन से करीब एक लाख रुपये और दो बीघा से दो लाख रुपये तक की आमद हो सकती है।

किस दवा का करें स्प्रे?

सोना मक्खी से बचाव के लिए प्रभावी कीटनाशकों का उपयोग जरूरी है। इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल या थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी फायदेमंद हैं। जैविक उपाय के तौर पर नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। छिड़काव सुबह या शाम करें और लगातार एक ही दवा का उपयोग न करें, दवाओं को बदल-बदल कर प्रयोग करें।

प्रकोप बढ़ा तो पौधा जल्दी सूखता है

अगर समय पर नियंत्रण न किया गया, तो पौधा 5–7 दिनों में मुरझाने लगता है, धीरे-धीरे पीला होकर कमजोर हो जाता है। डंक वाली जगह से सड़न शुरू होती है और अधिक प्रकोप में पूरी बेल 10–12 दिनों में खत्म हो सकती है।

सलाह

जैसे ही लक्षण दिखाई दें, तुरंत उपचार करें और फसल की निगरानी नियमित रखें। समय रहते बचाव से ही खीरे की फसल से अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

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