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मौसम के बदलते मिजाज से लीची की फसल पर असर, किसानों को बरतनी होगी सावधानी

Litchi crop protection tips: मुजफ्फरपुर के लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास के अनुसार इस साल बिहार में लीची के पेड़ों पर मंजर तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी मात्रा सामान्य वर्षों की तुलना में कुछ कम है। उन्होंने बताया कि नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में तापमान औसत से अधिक रहने के कारण इसका असर मंजर बनने पर पड़ा है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Mar 07, 2026 पर 1:34 PM
मौसम के बदलते मिजाज से लीची की फसल पर असर, किसानों को बरतनी होगी सावधानी
Litchi crop protection tips:  बागानों में लीची बग नामक कीट का प्रकोप भी देखा जा रहा है। 

इस साल मौसम के बदलते मिजाज का असर लीची की खेती पर देखने को मिल रहा है। कई बागानों में पेड़ों पर मंजर (फूल) तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या सामान्य वर्षों की तुलना में कम बताई जा रही है। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है, क्योंकि मंजर ही आगे चलकर फल में बदलते हैं। अगर इस चरण में किसी तरह की समस्या आ जाए तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में अचानक हुए उतार-चढ़ाव की वजह से लीची के पेड़ों की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

खासकर सर्दियों के शुरुआती महीनों में तापमान अपेक्षा से अधिक रहने के कारण कई जगह पेड़ों में नए पत्ते निकल आए। इससे मंजर बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ गई। ऐसे हालात में किसानों को इस समय बागानों की देखभाल और प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि आगे चलकर फसल को नुकसान से बचाया जा सके और बेहतर उत्पादन मिल सके।

सूखी मिट्टी में करें हल्की सिंचाई

पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में मिट्टी काफी सूखी हो गई है। ऐसे में जिन बागानों में नमी बहुत कम है, वहां किसान हल्की सिंचाई कर सकते हैं। हालांकि इस समय ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे मंजर को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। फल सेट होने के बाद ही नियमित सिंचाई करना बेहतर माना जाता है।

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