Get App

Farming tips: बिहार का देसी जुगाड़ वायरल! कंबल में सोते हैं तरबूज के बीज

Farming tips: ईस्ट चंपारण में तरबूज की खेती का अनोखा तरीका अपनाया जाता है। किसान बीजों को अंकुरित करने के लिए रातभर रजाई-कंबल में गर्म रखते हैं। यह फसल उपजाऊ मिट्टी में नहीं, बल्कि नदी किनारे की बालू में उगाई जाती है। ठंड से बचाने के लिए पौधों को खर-पतवार से ढक दिया जाता है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Apr 11, 2026 पर 3:32 PM
Farming tips: बिहार का देसी जुगाड़ वायरल! कंबल में सोते हैं तरबूज के बीज
Farming tips: तरबूज की खेती करीब 6 महीने चलती है।

बिहार के ईस्ट चंपारण जिले के संग्रामपुर इलाके में तरबूज की खेती का एक बेहद अनोखा और देसी तरीका देखने को मिलता है। यहां किसान तरबूज, जिसे स्थानीय भाषा में “लालमी” कहा जाता है, को उगाने के लिए आधुनिक मशीनों पर नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक अनुभव और जुगाड़ पर भरोसा करते हैं। खास बात यह है कि कड़कड़ाती ठंड में बीजों को अंकुरित करने के लिए किसान उन्हें अपने साथ रजाई-कंबल में रखकर सोते हैं, ताकि शरीर की गर्मी से बीजों को जरूरी ताप मिल सके।

ये तरीका सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसी से फसल की शुरुआत होती है। इस अनोखी परंपरा ने संग्रामपुर की खेती को अलग पहचान दी है, जहां मेहनत और देसी समझ मिलकर एक खास तरह की कृषि परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

देसी तरीका

किसान बली मुखिया लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि, तरबूज की खेती दिसंबर से शुरू होती है। बीजों को पहले 24 घंटे पानी में भिगोया जाता है। फिर इन्हें पत्तों में बांधकर किसान अपनी गोद में लेकर रातभर कंबल में रखते हैं। शरीर की गर्मी से बीज जल्दी फूट जाते हैं, वरना कड़ाके की ठंड में वे अंकुरित नहीं हो पाते।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें