बिहार के ईस्ट चंपारण जिले के संग्रामपुर इलाके में तरबूज की खेती का एक बेहद अनोखा और देसी तरीका देखने को मिलता है। यहां किसान तरबूज, जिसे स्थानीय भाषा में “लालमी” कहा जाता है, को उगाने के लिए आधुनिक मशीनों पर नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक अनुभव और जुगाड़ पर भरोसा करते हैं। खास बात यह है कि कड़कड़ाती ठंड में बीजों को अंकुरित करने के लिए किसान उन्हें अपने साथ रजाई-कंबल में रखकर सोते हैं, ताकि शरीर की गर्मी से बीजों को जरूरी ताप मिल सके।
