गर्मी में घट रहा है मुर्रा भैंस का दूध? ये आसान टिप्स बढ़ा देंगे मिल्क प्रोडक्शन

Milk Production Increasing Tips in Summer: गर्मी के मौसम में सही देखभाल न मिलने पर मुर्रा भैंस का दूध उत्पादन तेजी से घट सकता है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक इस दौरान संतुलित आहार, हरा और रसदार चारा तथा भरपूर पानी देना बेहद जरूरी है। एक वयस्क भैंस गर्मियों में 60-80 लीटर पानी पीती है। इलेक्ट्रोलाइट, मिनरल मिक्सचर और सीमित सूखा चारा दूध की मात्रा बनाए रखने में मदद करते हैं

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 12:58 PM
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Bhains ka Dudh Badhane ke Tips: गर्मी में ज्यादा भूसा या सूखा चारा देने से कब्ज और अपच की समस्या हो सकती है

गर्मी का मौसम शुरू होते ही मुर्रा भैंस पालने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूध उत्पादन को बनाए रखना होता है। मुर्रा भैंस देश की सबसे अधिक दूध देने वाली नस्लों में मानी जाती है और सामान्य स्थिति में यह 15 से 25 लीटर या उससे अधिक दूध दे सकती है। लेकिन तेज गर्मी और लू का असर इस पर जल्दी पड़ता है। यदि इस मौसम में सही देखभाल न की जाए तो दूध की मात्रा अचानक कम हो सकती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

तापमान बढ़ते ही क्यों कम हो जाता है दूध?

पशु चिकित्सकों के अनुसार गर्मी बढ़ने के साथ ही भैंस की भूख कम होने लगती है। जब पशु पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं खाता तो उसके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। इसलिए गर्मियों में भैंस के खानपान और पानी की सही व्यवस्था करना बेहद जरूरी माना जाता है।


हरा और रसदार चारा देना है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में मुर्रा भैंस को अधिक से अधिक हरा और रसदार चारा देना चाहिए। ज्वार, मक्का, बाजरा और नेपियर घास जैसे चारे शरीर में पानी की कमी को दूर रखते हैं और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखते हैं। ऐसे चारे से भैंस को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और दूध उत्पादन भी स्थिर बना रहता है।

सूखा चारा सीमित मात्रा में दें

गर्मी के दौरान ज्यादा भूसा या सूखा चारा देने से भैंस को कब्ज और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर सूखा चारा देना जरूरी हो तो उस पर हल्का पानी छिड़ककर खिलाना बेहतर माना जाता है। इससे धूल नहीं उड़ती और पशु को खाने में भी आसानी होती है।

संतुलित दाना बढ़ाता है दूध की मात्रा

दूध देने वाली भैंसों के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी होता है। आमतौर पर हर 2 से 2.5 लीटर दूध पर करीब 1 किलो संतुलित दाना देना उपयुक्त माना जाता है। इस दाने में प्रोटीन, ऊर्जा, विटामिन और खनिज तत्व पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए। साथ ही मिनरल मिक्सचर और नमक मिलाने से कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी नहीं होती और पशु की प्रजनन क्षमता भी बेहतर बनी रहती है।

पानी और इलेक्ट्रोलाइट की सही व्यवस्था

गर्मी के मौसम में एक वयस्क मुर्रा भैंस रोजाना 60 से 80 लीटर तक पानी पी सकती है। इसलिए दिन में 3 से 4 बार साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना जरूरी है। सप्ताह में दो से तीन बार पानी में इलेक्ट्रोलाइट पाउडर मिलाकर देने से डिहाइड्रेशन और लू का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

धूप से बचाव भी उतना ही जरूरी

विशेषज्ञों की सलाह है कि दोपहर की तेज धूप से भैंसों को बचाकर रखना चाहिए। इसके लिए पशुशाला में शेड, पंखा या फॉगर्स की व्यवस्था करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा सुबह और शाम के समय चारा खिलाने से भैंस आराम से खा पाती है और उसका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है।

सही देखभाल से गर्मी में भी बना रहेगा दूध उत्पादन

पशुपालकों का अनुभव भी यही बताता है कि अगर गर्मियों में भैंस को संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव दिया जाए तो दूध उत्पादन में ज्यादा गिरावट नहीं आती। सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान गर्मी के मौसम में भी दूध उत्पादन स्थिर रख सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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