Farming Tips: धान के बाद खाली खेत न छोड़ें, उगाएं ये फसल और कमाएं अच्छा मुनाफा

Farming Tips: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में किसान अब पारंपरिक धान के साथ अन्य फसलों की खेती भी अपना रहे हैं। कृषि विभाग जायद सीजन में उड़द की खेती को बढ़ावा दे रहा है। यह कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है, जिससे अच्छी आमदनी के साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 1:45 PM
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Farming Tips: उड़द की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। यहां के किसान अब केवल पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी फसलों की तरफ भी रुख कर रहे हैं। बढ़ती लागत और बेहतर आमदनी की उम्मीद ने किसानों को नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। इसी वजह से कृषि विभाग भी किसानों को अलग-अलग फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। खासतौर पर जायद सीजन में उड़द और तिल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और अच्छी कमाई का मौका देती हैं।

विभाग की ओर से किसानों को उन्नत बीज, खेती की सही तकनीक और जरूरी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को खेती का दायरा बढ़ाने और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल रही है। नई फसलों की ओर बढ़ता यह रुझान किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प बनता जा रहा है।

गर्मियों में उड़द की खेती से अच्छा मुनाफा

कृषि उप संचालक फूल सिंह मालवीय के मुताबिक उड़द जायद सीजन की कम अवधि वाली फसल है। इसकी बुआई का सबसे अच्छा समय मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक माना जाता है। सही समय पर बोवाई करने से यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण किसानों को बढ़िया कमाई भी हो सकती है।


बेहतर पैदावार के लिए ऐसे तैयार करें खेत

उड़द की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है। किसान दो से तीन बार हैरो या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना सकते हैं। अंतिम जुताई से पहले प्रति हेक्टेयर दो से तीन टन गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है। साथ ही खेत में पानी की निकासी की व्यवस्था करना और पाटा चलाकर खेत को समतल करना भी जरूरी होता है।

बुआई का सही तरीका और बीज की मात्रा

अगर किसान एक हेक्टेयर जमीन में उड़द की बुआई करना चाहते हैं तो लगभग 12 से 15 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी करीब 30 से 34 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बुआई के 15 से 20 दिन बाद हल्की सिंचाई करना पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए जरूरी माना जाता है।

मिट्टी की सेहत के लिए भी फायदेमंद

उड़द की खेती सिर्फ उत्पादन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि जमीन की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है। यह दलहनी फसल होती है और इसकी जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर करने में मदद करते हैं। इससे जमीन की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल जैसे गेहूं या धान को भी फायदा मिलता है।

किसानों को मिल रहे सब्सिडी वाले बीज

कृषि विभाग के अनुसार तिलहन मिशन के तहत जिले में तिल की खेती के लिए 500 हेक्टेयर और उड़द की खेती के लिए करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया गया है। किसान अपने विकासखंड के कृषि विभाग कार्यालय से उड़द और तिल के बीज ले सकते हैं। इन बीजों पर सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे किसानों को खेती करने में आर्थिक मदद मिल रही है।

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