मार्च से अप्रैल का समय आम के बागों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान पेड़ों पर आए बौर धीरे-धीरे छोटे फलों यानी टिकोले में बदलने लगते हैं। यह वह चरण होता है जब किसान अपनी अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन कई बार देखने को मिलता है कि फल बनने के बाद भी टिकोले समय से पहले गिरने लगते हैं या उनका आकार छोटा ही रह जाता है। ऐसी स्थिति में किसानों को काफी चिंता होने लगती है, क्योंकि इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। दरअसल, इस समस्या के पीछे कई छोटे-छोटे कारण हो सकते हैं, जैसे पौधों की सही देखभाल न होना, कीटों का प्रकोप या जरूरी पोषण की कमी।
अगर इस समय पौधों पर विशेष ध्यान दिया जाए और कुछ जरूरी उपाय अपनाए जाएं, तो इन परेशानियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। सही समय पर देखभाल करने से आम के पेड़ों की बढ़वार अच्छी होती है और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है
गर्मी का मौसम आम की खेती के लिए फायदेमंद
रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के कृषि रक्षा प्रभारी ऋषि कुमार चौरसिया के अनुसार आम की बागवानी के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त होता है। इसी समय पेड़ों पर बौर आने के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर इस दौरान बागवान थोड़ी भी लापरवाही कर दें, तो फल झड़ने या कमजोर रहने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए इस समय पौधों की देखभाल और सुरक्षा बेहद जरूरी होती है।
टिकोले दिखते ही करें दवा का छिड़काव
विशेषज्ञों का कहना है कि जब पेड़ों पर बौर के बाद छोटे-छोटे टिकोले दिखाई देने लगें, उसी समय जरूरी दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। इससे कीटों से बचाव होता है और फल झड़ने की समस्या भी कम हो जाती है। समय पर सही दवा डालने से आम का आकार भी अच्छा बनता है और पौधे की बढ़वार भी बेहतर होती है।
ऐसे तैयार करें दवा का घोल
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक इमिडाक्लोप्रिड दवा को लगभग 6 मिली दवा 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। वहीं प्लानोफिक्स को 1 मिली दवा 4 से 5 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। इन दवाओं का सही मात्रा में उपयोग करने से आम के पेड़ों को कीटों से सुरक्षा मिलती है, फल गिरने की समस्या कम होती है और पैदावार भी अच्छी होती है।