उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में सरसों की खेती किसानों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसे कम लागत वाली और अधिक मुनाफा देने वाली फसल माना जाता है, क्योंकि इसमें निवेश कम और उत्पादन अधिक होता है। यही वजह है कि किसान इसे बड़े पैमाने पर उगाते हैं। सरसों की खेती न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह कृषि गतिविधियों में स्थिरता भी लाती है। इस फसल की एक खास बात यह है कि यह अपेक्षाकृत कम देखभाल में अच्छी उपज देती है। इसके बीज, खाद और सिंचाई की लागत अन्य फसलों की तुलना में कम होती है, जिससे किसानों के खर्चे नियंत्रित रहते हैं।
इसके अलावा, सरसों की बाजार में मांग लगातार बनी रहती है और इसका मूल्य संतोषजनक होता है। यही कारण है कि लखीमपुर खीरी के किसान सरसों को प्राथमिक फसल के रूप में चुनते हैं और इसे उगाने में विशेष ध्यान देते हैं।
दिसंबर के महीनों में मौसम में बदलाव और घना कोहरा पड़ने के कारण सरसों की फसल में कीट और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। खेतों में अधिक नमी के कारण फसल प्रभावित हो रही है और किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि फली बनने के समय पर सिंचाई करना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पानी देने से फसल का विकास बेहतर होता है और दाने भराव भी अच्छा होता है।
सूर्य प्रताप सिंह ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि दिसंबर में सरसों में सबसे ज्यादा व्हाइट रस्ट रोग का खतरा रहता है। पत्तियों और फलियों पर सफेद फफूंदी जैसी लक्षण दिखाई देती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इसके लिए 600-800 ग्राम मैनकोजेब को 250-300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव किया जा सकता है।
एफिड (माहू) कीट का नियंत्रण
पुष्पावस्था में माहू कीट का भी प्रकोप देखा जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए किसान प्रति एकड़ 2 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव कर सकते हैं।
बाजार में वर्तमान समय में सरसों 6000-7000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। ये फसल लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है, जिससे किसान सही समय पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कम लागत, बेहतर उत्पादन और भंडारण की सुविधा सरसों को किसानों के लिए लाभकारी फसल बनाती है।