गेहूं की फसल पर रोगों का हमला, समय पर पहचान से बच सकती है पैदावार

Wheat Crop Rust: बिलासपुर के कृषि रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद निर्मलकर के मुताबिक, तापमान बढ़ते ही गेहूं में ब्राउन रस्ट सहित कई रोग तेजी से फैल सकते हैं। पत्तियों, बालियों और जड़ों में दिखने वाले लक्षणों से इनकी पहचान संभव है। समय रहते जैविक या रासायनिक उपाय अपनाकर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है

अपडेटेड Feb 15, 2026 पर 1:07 PM
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रबी सीजन में गेहूं की फसल किसानों की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। यही फसल सालभर की मेहनत का बड़ा हिस्सा तय करती है और परिवार की आमदनी का मजबूत सहारा बनती है। लेकिन बदलते मौसम का असर अब खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी अचानक तापमान बढ़ जाता है तो कभी नमी का स्तर बदल जाता है, जिसका सीधा प्रभाव फसल की सेहत पर पड़ता है। ऐसे हालात में गेहूं में अलग-अलग तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो समय रहते पहचान न होने पर उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और नियमित निरीक्षण ही सबसे बड़ा बचाव है।

यदि किसान खेत का लगातार जायजा लें और पत्तियों, बालियों व जड़ों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दें, तो रोग की पहचान शुरुआती अवस्था में ही संभव है। समय पर समझदारी भरा कदम उठाकर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

ताप बढ़ते ही ब्राउन रस्ट का अटैक


गर्मी बढ़ते ही ब्राउन रस्ट यानी भूरा रतुआ दिखने लगता है। पत्तियों पर जंग जैसे भूरे-नारंगी दाग बनते हैं।

बचाव: नीम तेल या ट्राइकोडर्मा का छिड़काव। जरूरत पड़े तो मैनकोजेब या टेबुकोनाजोल का प्रयोग।

ठंड-नमी में पीला रतुआ

ठंडे और नम मौसम में पत्तियों पर पीली धारियों जैसा चूर्ण दिखे तो समझिए पीला रतुआ है।

उपाय: प्रोपिकोनाजोल/टेबुकोनाजोल या नीम आधारित घोल का छिड़काव।

झुलसा रोग

भूरे-पीले बड़े धब्बे और सूखती पत्तियां झुलसा रोग की निशानी हैं।

उपचार: मैनकोजेब या दशपर्णी अर्क, ट्राइकोडर्मा का उपयोग।

कंडुआ

इसमें दानों की जगह काला पाउडर भर जाता है।

बचाव: बुवाई से पहले बीज उपचार कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से।

जड़ सड़न

जलभराव से जड़ें काली होकर सड़ जाती हैं।

उपाय: सही जल निकासी, नीम खली और कार्बेन्डाजिम का इस्तेमाल।

नियमित निगरानी ही असली बचाव

डॉ. निर्मलकर का कहना है कि समय पर पहचान और तुरंत इलाज से नुकसान काफी कम किया जा सकता है। खेत की नियमित जांच ही सबसे बड़ा हथियार है।

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