बिहार के सीतामढ़ी जिले के मझौरा गांव की मीणा देवी की कहानी मेहनत, लगन और आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण है। उनके पास अपनी कोई जमीन नहीं थी, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और लीज पर खेत लेकर खेती की दुनिया में कदम रखा। शुरू में परिस्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। पति की कमाई और बढ़ती महंगाई के बीच परिवार का खर्च चलाना कठिन था, लेकिन मीणा देवी ने हिम्मत जुटाई और खेती के जरिए घर की आर्थिक स्थिति सुधारने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ आलू, धान, गेहूं, मक्का और ईख (गन्ना) की खेती शुरू की। न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि उन्होंने मूल्य संवर्धन (Value Addition) के जरिए गुड़ बनाकर बाजार में बेचने का तरीका अपनाया।
इससे उनकी आय दोगुनी हो गई। आज मीणा देवी सालाना 3–4 लाख रुपये कमा रही हैं और अपने परिवार को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन दे रही हैं। उनकी कहानी हर महिला के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
मीणा देवी के पति बाहर नौकरी करते हैं, जहां से उन्हें सिर्फ 8–10 हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। बढ़ती महंगाई और घर के खर्च की जिम्मेदारी ने मीणा देवी को खेती की ओर प्रेरित किया। उन्होंने तय किया कि घर की आर्थिक समस्याओं का समाधान खुद करेंगी और परिवार को बेहतर जीवन देंगी।
बिना जमीन के खेती करना आसान नहीं था, लेकिन मीणा देवी ने डेढ़ बीघा जमीन लीज पर लेकर 5 वर्षों से मेहनत कर रही हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ धान, गेहूं, मक्का, आलू और गन्ना की खेती शुरू की। आलू और हरी सब्जियों की खेती से उन्हें सालभर नियमित आय मिलती है।
मीणा देवी केवल गन्ना बेचकर संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने अपने स्तर पर शुद्ध गुड़ तैयार करना शुरू किया, जिसे स्थानीय बाजारों में बेचकर अपनी आमदनी दोगुना कर लिया।
आज मीणा देवी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं और परिवार के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित कर रही हैं। उनकी मेहनत ने न केवल आर्थिक सुरक्षा दी, बल्कि समाज में उन्हें एक नई पहचान भी दिलाई है।