Tata Motors के लखनऊ प्लांट से सीएम योगी ने दिखाई 10 लाखवीं गाड़ी को हरी झंडी, टाटा ग्रुप के चेयरमैन चंद्रशेखरन ने कर दी बड़ी घोषणा

Tata Motors Lucknow plant: उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति में बुधवार (15 अप्रैल) को एक ऐतिहासिक पड़ाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित टाटा मोटर्स के प्लांट में बने 10 लाख वीं कमर्शियल गाड़ी को हरी झंडी दिखाई। यह उपलब्धि न केवल टाटा ग्रुप के लिए, बल्कि पूरे यूपी के औद्योगिक परिदृश्य के लिए गर्व का विषय है

अपडेटेड Apr 15, 2026 पर 2:32 PM
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Tata Motors Lucknow plant: सीएम योगी ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का एक ऐतिहासिक पड़ाव है

Tata Motors Lucknow plant: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बुधवार (15 अप्रैल) को लखनऊ स्थित टाटा मोटर्स के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में बने 10 लाखवें कमर्शियल व्हीकल यूनिट को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उत्तर प्रदेश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट मिनिस्टर नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' भी मौजूद थे। सीएम योगी ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। यह उपलब्धि न केवल टाटा ग्रुप कंपनी के लिए, बल्कि पूरे यूपी के औद्योगिक परिदृश्य के लिए गर्व का अवसर है।

सीएम योगी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में आज से 8-9 वर्ष पहले जो स्थितियां थीं...। पहचान का संकट था। चुनौतियां थीं... कनेक्टिविटी उतनी अच्छी नहीं थी... तय कर पाना कठिन था कि सड़क है या गड्ढा है... सुरक्षा का संकट था, न नीयत साफ थी और न कोई नीति ही थी। परिणाम क्या था? निवेश करने में लोग डरते थे।"

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "आज सुरक्षा का माहौल भी है... इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतरीन मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में देखने को मिलता है... अभी इसी महीने गंगा एक्स्प्रेसवे प्रधानमंत्री के द्वारा राष्ट्र को समर्पण करने का भी समारोह होने जा रहा है। लगभग 600 किलोमीटर का यह एक्स्प्रेसवे बनने के बाद उत्तर प्रदेश का देश के कुल एक्स्प्रेसवे में योगदान 60% हो जाएगा।"


टाटा ग्रुप के चेयरमैन का बड़ा ऐलान

इस ऐतिहासिक मौके पर मौजूद टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में 20 लाख गाड़ियां लॉन्च करना है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने लखनऊ प्लांट से हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक बनाने की योजना बना रही है। चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप और उत्तर प्रदेश राज्य के बीच मजबूत हो रही औद्योगिक साझेदारी पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि विकास की गति को देखते हुए अगले पांच सालों के भीतर 20 लाख गाड़ियों का मील का पत्थर हासिल कर लिया जाएगा। जहां पहले हमारा पोर्टफोलियो सीमित था। वहीं, अब इसका काफी विस्तार हुआ है। पारंपरिक ट्रकों और बसों के अलावा हम कई तरह के पावरट्रेन वाली गाड़ियां बना रहे हैं, जिनमें डीजल, CNG और इलेक्ट्रिक शामिल हैं। भविष्य में यहां हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक भी बनाए जाएंगे।"

उन्होंने बताया कि लखनऊ प्लांट का 'विकास भारत' के 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के व्यापक दृष्टिकोण के साथ-साथ मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के भी अनुरूप है। उन्होंने आगे कहा, "भारत में अपार अवसर हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ दशकों में यहाँ की अर्थव्यवस्था दुनिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेजी से बढ़ेगी। 2047 तक 'विकसित भारत' और 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के रूप में 'विकसित उत्तर प्रदेश' का दृष्टिकोण इसी क्षमता को दर्शाता है।"

34 साल के सफर का जश्न

इस कार्यक्रम के साथ ही लखनऊ प्लांट के 34 साल के सफर का जश्न मनाया गया। यहां 1992 में कंपनी ने अपना काम शुरू किया था। चंद्रशेखरन ने इस प्लांट को टाटा ग्रुप और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी और भरोसे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "10 लाखवीं गाड़ी को बनते देखना बहुत खुशी की बात है। यह मील का पत्थर सिर्फ कमर्शियल सफलता का पैमाना नहीं है। बल्कि टाटा ग्रुप और उत्तर प्रदेश के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी का भी एक सबूत है।" उन्होंने आगे कहा कि जहां पहली 10 लाख गाड़ियों को बनने में तीन दशक से ज्यादा का समय लगा। वहीं अगली 10 लाख गाड़ियों के बहुत तेजी से बनने की उम्मीद है।

चंद्रशेखरन ने आगे बताया कि ग्रुप का विस्तार राज्य में सॉफ्टवेयर, बिजली, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और रक्षा जैसे कई सेक्टरों में हो रहा है। उन्होंने बताया कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) में अभी लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में लगभग 20,000 कर्मी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में इस वर्कफ़ोर्स को बढ़ाकर 40,000 करने का अनुमान है।

उन्होंने ग्रुप की सामाजिक विकास की पहलों के बारे में भी बताया, जिसमें मथुरा में जल निकायों को फिर से जीवित करने के प्रोजेक्ट और कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं। चंद्रशेखरन ने गोरखपुर में एक AI टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने की घोषणा की। इसका मकसद इस क्षेत्र में औद्योगिक और सामाजिक बदलाव लाना है।

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