India Auto Fuel Rules: सरकार ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। इस बदलाव का मकसद ईंधन (फ्यूल) की नई श्रेणियां तय करना है, ताकि ज्यादा मात्रा में एथेनॉल और बायोफ्यूल मिलाने के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
CNBC-TV18 ने सबसे पहले 22 अप्रैल को रिपोर्ट किया था कि भारत E20 से आगे बढ़ सकता है, और सरकार E85 से E100 तक के उच्च इथेनॉल वाले फ्यूल की टेस्टिंग की अनुमति दे सकती है।
नए ड्राफ्ट में अब इन फ्यूल कैटेगरी को नियमों में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने उत्सर्जन (एमिशन) से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें हाइड्रोजन, पेट्रोल और बायोडीजल जैसे फ्यूल की नई कैटेगरी भी शामिल की गई हैं।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में मुख्य बदलाव:
यह ड्राफ्ट 30 दिनों तक सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला रहेगा, जिसके बाद सरकार संशोधनों को अंतिम रूप देने से पहले प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगी।
पॉलिसी ब्रेकअप: उच्च इथेनॉल टेस्टिंग की तैयारी
जैसा कि CNBC-TV18 ने पहले बताया था, यह कदम तुरंत ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल को लागू करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके टेस्ट और जांच के लिए नियम बनाने की दिशा में एक कदम है।
सूत्रों के मुताबिक, ऑटो कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है, ताकि E85 से E100 तक के फ्यूल के लिए गाड़ियों की तैयारी (फ्लेक्स-फ्यूल) और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन किया जा सके।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने एथेनॉल ब्लेंडिंग को आयात कम करने की एक अहम रणनीति बताया, जिसे इंडस्ट्री का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है।
बता दें कि ब्राजील जैसे देश पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम में E100 का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अमेरिका में कुछ पेट्रोल पंपों पर E85 उपलब्ध है। भारत के ड्राफ्ट में इसी तरह के प्रयोग की दिशा में शुरुआती कदम सुझाए गए हैं, हालांकि वर्तमान में पूरे देश में E20 पर ही ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
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