सरकार ने पिछले दशक में कृषि पर खर्च बढ़ाया है। इस सेक्टर के लिए बजट आवंटन जीडीपी का तकरीबन 17 पर्सेंट है और यहां बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलता है। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 2014 में सत्ता संभालने के बाद से कृषि पर खर्च में 6 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। सरकार की फ्लैगशिप स्कीम- पीएम किसान (PM-KISAN) के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं। कृषि क्षेत्र के कुल आवंटन में पीएम-किसान स्कीम की बड़ी हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा तकरीबन 50 पर्सेंट तक बैठता है।
मनीकंट्रोल की एनालिसिस के मुताबिक, संबंधित अवधि में अन्य स्कीम के बजट में भी शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2014-15 के बाद से कृषि बजट में 6 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार पीएम-किसान से इतर अन्य कृषि योजनाओं पर 65,529 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। 2019-20 के बाद से कृषि बजट की ग्रोथ 5.4 पर्सेंट सीएजीआर रही, जबकि पीएम-किसान स्कीम पर खर्च सालाना 6.5 पर्सेंट बढ़ा है।
बजट की रकम में फसल बीमा और ब्याज सब्सिडी संबंधी योजनाओं की अहम हिस्सेदारी है। आगामी बजट में पीएम-किसान स्कीम के अलावा, अन्य योजनाओं के मद से जुड़ी रकम में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है। केंद्रीय कैबिनेट ने इसी साल फसल बीमा स्कीम में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। स्कीम की रकम बढ़कर 16,070 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह बजट 14,600 करोड़ रुपये था।
एग्रीकल्चर रिसर्च को बढ़ावा देने की जरूरत
एग्रीकल्चरल रिसर्च पर खर्च में एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2020 के दौरान रिसर्च में सालाना आधार पर 9.2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि दूसरे कार्यकाल में यह रफ्तार घटकर 5.7 पर्सेंट हो गई। वित्त वर्ष 2015 में यह खर्च 4,840 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 7,523 करोड़ रुपये हो गया। सरकार की योजना वित्त वर्ष 2025 में एग्रीकल्चरल रिसर्च पर 9,941 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।