इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को इनकम टैक्स घटाने की सलाह दी है। 24 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इकोनॉमिस्ट्स से यूनियन बजट 2025 के बारे में चर्चा की थी। इस बैठक में इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के उपायों सहित कई मसलों पर चर्चा हुई। अर्थशास्त्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी को इनकम टैक्स में कमी करने की भी सलाह दी। उनका कहना था कि इनकम टैक्स में कमी करने से कई फायदे होंगे। वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट पेश करेंगी।
टैक्स घटाने से लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे
इकोनॉमिस्ट्स ने बैठक में कहा कि आम आदमी पर इनकम टैक्स (Income Tax) का बोझ घटाने से उसके हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा। इससे सेविंग्स और कंजम्प्शन दोनों बढ़ेंगी। टैक्सपेयर्स के ज्यादा खर्च करने से डिमांड बढ़ेगी, जिसका सीधा असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ेगा। अभी ग्रोथ बढ़ाना सरकार की प्रायरिटी है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.4 फीसदी पर आ गई। जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) में तेज गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
इनकम टैक्स की नई रीजीम बजट 2020 में आई थी
सरकार ने बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम पेश की थी। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स नेट के तहत लाना था। नई रीजीम में टैक्सेपयर्स को डिडक्शन का फायदा नहीं मिलता है। लेकिन, इसमें टैक्स की दर कम है। सरकार का मानना है कि जो लोग टैक्स-सेविंग्स नहीं कर सकते हैं, उनके लिए इनकम टैक्स की नई रीजीम अट्रैक्टिव है। इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम जटिल है। इसमें कई तरह के डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। इससे टैक्स कैलकुलेशन थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
अभी 10 लाख से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स
सरकार ने नई रीजीम में सालाना 7 लाख रुपये और पुरानी रीजीम में सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स में राहत दी है। लेकिन, पुरानी रीजीम में 10 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर टैक्स का सबसे ज्यादा स्लैब लागू होता है। यह 30 फीसदी है। नई रीजीम में 15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना इनकम पर 30 फीसदी टैक्स का स्लैब लागू होता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इसमें बदलाव करने की जरूरत है। जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उससे 10 लाख और 15 लाख की इनकम ज्यादा नहीं रह गई है। खासकर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में इतनी इनकम एक परिवार के लिए कम पड़ती है।
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मिडिल क्लास को टैक्स में राहत की दरकार
सरकार को 30 फीसदी टैक्स ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए तय करना चाहिए, जिनकी सालाना इनकम कम से कम 25-30 लाख रुपये से ज्यादा है। इससे मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे वह ज्यादा खर्च कर सकेगा। इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसका पॉजिटिव असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ेगा। उम्मीद है कि वित्तमंत्री 1 फरवरी, 2025 को पेश होने वाले बजट में इस बारे में ऐलान करेंगी।