सरकार सेमीकंडक्टर बनाने वाली विदेशी कंपनियों को देश में उत्पादन के लिए अट्रैक्ट करना चाहती है। इसके लिए यूनियन बजट में बड़ा ऐलान हो सकता है। सरकार सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए टैक्स के नियमों को आसान बनाना चाहती है। इसके लिए यूनियन बजट 2025 में वह इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन कर सकती है। सरकार सेक्शन 44 के तहत प्रिज्मटिव टैक्सेशन स्कीम पेश कर सकती है। इससे सेमीकंडक्टर बनाने वाली ग्लोबल कंपनियों के लिए इंडिया में निवेश करने का आकर्षण बढ़ जाएगा। सरकार के एक सीनियर अफसर ने यह जानकारी दी।
सरकार इंडस्ट्री की राय लेगी
सरकार के सीनियर अफसर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर (Semiconductor Companies) कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन का स्टडी करेगी। इसके बाद इंडस्ट्री की राय ली जाएगी। उन्होंने कहा, "अभी कंपनियां सिर्फ टर्नओवर पर टैक्स दे रही हैं। एसेसिंग अफसरों को इसकी और जांच करने की जरूरत नहीं है। इससे विदेश कंपनियों के लिए निवेश करना आसान हो जाता है। "
कई इंडस्ट्री के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम है
इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव फाइनेंस बिल 2025 में शामिल किया जा सकती है। दरअसल, सरकार इंडिया को दुनिया में सेमीकंडक्डक्टर का हब बनाना चाहती है। सरकार पहले ही सेमीकंडक्डक्टर कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने के वास्ते स्कीम का ऐलान कर चुकी है। प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम पहले से कई इंडस्ट्री के लिए उपलब्थ है। इनमें ऑयल और शिपिंग कंपनीज शामिल हैं। इसमें उनके टर्नओवर के एक हिस्से को इनकम माना जाता है, जिस पर टैक्स लगाया जाता है। इससे कंपनियों को डिटेल अकाउंटिंग की जरूरत नहीं रह जाती है।
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MeitY ने निवेश आकर्षित करने के लिए नियम में बदलाव की सलाह दी थी
प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत विदेशी कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट इनकम टैक्स का रेट आम तौर पर 35 फीसदी है। इससे पहले मिनिस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स के नियमों को आसान बनाने की सलाह दी थी। उसने कहा था कि ऐसी विदेशी कंपनियो के लिए टैक्स के नियम आसान बनाए जाने चाहिए जो इंडिया में उत्पादन के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और लैब लगाना चाहती है।