Budget 2025 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, एक फरवरी को देश का आम बजट 2025 लोकसभा में पेश करेंगी। वहीं इससे पहले 31 जनवरी को संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई और देश के इकोनॉमी सर्वे को पेश किया गया। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार आठवीं बार लोकसभा में देश का आम बजट पेश करेंगी। वहीं पिछले साल उनके बजट भाषण की काफी चर्चा थी। साल 2024 में अंतरिम बजट पेश करते हुए उनकी बजट स्पीच काफी छोटी थी, जो लगभग 60 मिनट तक चली। आइए जानते हैं, बजट पेश करते हुए किस वित्त मंत्री ने कितना लंबी स्पीच दी है।
भारत में सबसे लंबा बजट भाषण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2020 में पेश किया था। वहीं साल 1977 में हीरूभाई मूलजीभाई पटेल ने भारत का सबसे छोटा बजट भाषण पेश किया था, ये बजट भाषण सिर्फ 800 शब्दों का था। इस वजह से इस बजट को भारत के इतिहास में सबसे छोटे बजट के रुप में देखा जाता है
किसने दिया सबसे लंबा भाषण
आपको बता दें कि साल 2020 में निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट पेश करते हुए भारत के इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण दिया था, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला था। वर्ष 2019 भारत के आर्थिक इतिहास में एक खास साल रहा, क्योंकि यह भारत की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया पहला फूल बजट था। इस बजट में 10-सूत्रीय दृष्टिकोण, एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स के लिए विशेष लाभ जैसे अहम बिंदु थे। उस वर्ष उनका भाषण 2 घंटे और 17 मिनट तक चला। जसवंत सिंह का 2003 का बजट भाषण 2 घंटे 13 मिनट लंबा था। अपने इस भाषण में उन्होंने सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा का प्रस्ताव रखा, आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग शुरू करने की घोषणा की और कुछ वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क घटाने का सुझाव दिया।
पूर्व पीएम के नाम भी दर्ज है ये रिकॉर्ड
2014 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कर छूट स्लैब को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 लाख करने का ऐलान किया। इसके अलावा, उन्होंने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अरुण जेटली का ये बजट स्पील करीब 2 घंटे 10 मिनट तक चला था। वहीं शब्दों के हिसाब से देखें तो सबसे लंबा भाषण पूर्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह का था। उन्होंने 1991 में अपने बजट भाषण में 18,700 शब्दों का इस्तेमाल किया था। बजट 2024 के संदर्भ में सबसे छोटा भाषण 1977 में हीरूभाई एम. पटेल का था। उन्होंने उस साल अंतरिम बजट पेश किया था, जिसमें केवल 800 शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।