Budget 2025: डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती हैं निर्मला सीतारमण, जानिए अभी क्या हैं नियम

सरकार ने बजट 2023 में बॉन्ड फंड के कैपिटल गेंस के नियमों में कई बदलाव किए थे। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स के कैलकुलेशन के लिए इंडेक्सेशन बेनेफिट खत्म कर दिया गया था। नए नियम के तहत डेट फंडों में निवेश से हुए कैपिटल गेंस को इनवेस्टर की इनकम में जोड़ दिया जाता है

अपडेटेड Dec 28, 2024 पर 11:39 AM
बजट 2023 में डेट म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो गए थे।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमों के टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती हैं। इससे म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 में डेट स्कीम के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव किए थे। इससे डेट स्कीमों में निवेशकों की दिलचस्पी घट गई थी। फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि अगर डेट स्कीम के टैक्स नियमों में सरकार बदलाव करती है तो इससे डेट फंडों में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है।

बजट 2023 में डेट फंडों के टैक्स नियम में हुए थे बड़े बदलाव

बजट 2023 में डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Fund) के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो गए थे। उसके बाद से सरकार ने नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस साल 23 जुलाई को पेश यूनियन बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कई एसेट के लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में कई बदलाव के ऐलान किए थे। लेकिन, उन्होंने म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमों के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे डेट म्यूचुअल फंड के निवेशकों को काफी निराशा हुई थी।


अभी क्या हैं डेट फंडों के कैपिटल गेंस टैक्स के नियम?

सरकार ने बजट 2023 में बॉन्ड फंड के कैपिटल गेंस के नियमों में कई बदलाव किए थे। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स के कैलकुलेशन के लिए इंडेक्सेशन बेनेफिट खत्म कर दिया गया था। नए नियम के तहत डेट फंडों में निवेश से हुए कैपिटल गेंस को इनवेस्टर की इनकम में जोड़ दिया जाता है। नए नियम में डेट फंडों में निवेश पर हुए मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस में नहीं बांटा जाता है। इसका मतलब है कि डेट फंडों में निवेश को बेचने पर अब समय के लिहाज से कोई फर्क नहीं रह गया है। निवेशक चाहे 1 एक साल से पहले बेचे या एक साल के बाद उसे अपनी इनकम के टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स चुकाना होगा।

नियमों में बदलाव करने की क्यों जरूरत है?

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार लंबी अवधि के निवेस को बढ़ावा देती है। लेकिन, डेट फंडों के मामले में यह बात नहीं दिखती है। निवेशक के लिए अपने इनवेस्टमेंट का कुछ हिस्सा डेट में करना फायदेमंद है। लेकिन, टैक्स के मौजूदा नियम से डेट फंडों में निवेश का आकर्षण कम हो गया है। सरकार डेट फंडों में लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी टैक्स का रेट लागू कर सकती है, जो दूसरे एसेट्स के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर लागू है।

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नए नियमों का डेट फंडों में निवेश पर असर

इससे ज्यादा इनकम लोगों की दिलचस्पी डेट फंडों में निवेश बढ़ेगी। अभी नई टैक्स रीजीम में सालाना 15 लाख रुपये से ज्यादा आमदनी पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। ओल्ड टैक्स रीजीम में सालाना 10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। इससे ज्यादा इनकम वाले लोग डेट फंड में निवेश नहीं करना चाहते हैं।

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