वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण डायरेक्ट टैक्स कोड के बारे में 1 फरवरी को बड़ा ऐलान करने जा रही हैं। डायरेक्ट टैक्स कोड में सरकार चरणबद्ध तरीके से बदलाव करेगी। सीतारमण पहले चरण के बदलाव का ऐलान यूनियन बजट 2025 में करेंगी। सरकार डायरेक्ट टैक्स के नियमों को आसान बनाना चाहती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 के यूनियन बजट में कहा था कि सरकार डायरेक्ट टैक्स कोड को रिव्यू करेगी। इसके लिए सरकार ने एक उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस समिति ने डायरेक्ट टैक्स कोड को रिव्यू का काम पूरा कर लिया है।
1 फरवरी को निर्मला सीतारमण के ऐलान पर नजरें
डायरेक्ट टैक्स कोड (Direct Tax Code) रिव्यू के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2025 में रिफॉर्म्स का जो प्रस्ताव पेश करेंगी उसमें टैक्स कानूनों को सरल बनाने, कंप्लायंस प्रोसेस को इम्प्रूव करने और बहुत पुराने पड़ चुके प्रावधानों को खत्म करने पर फोकस होगा। सूत्र ने यह भी बताया कि डायरेक्ट टैक्स कोड में बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का मकसद यह है कि टैक्सपेयर्स को नए नियमों के इस्तेमाल के लिए ज्यादा वक्त मिल जाएगा। इससे उन्हें दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
TDS के नियमों को आसान बनाने पर फोकस
सरकार का ज्यादा फोकस टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (TDS) के नियमों को आसान बनाने पर है। अगर इस बारे में उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशें मान ली जाती हैं तो टीडीएस स्लैब की संख्या घट सकती है। सरकार टीडीसी के नियमों को आसान बनाने के साथ टैक्स स्लैब की संख्या में कमी करना चाहती है। EY India में टैक्स पार्टनर श्रीनिवासुलु ने बताया कि डायरेक्ट टैक्स कोड के रिव्यू का मकसद इसे आसान और समझने में आसान बनाना है। इसलिए नए टैक्स कोड के लैंग्वेज पर सरकार का खास फोकस है। इससे टैक्स से जुड़े विवादों के मामलों में भी कमी आएगी।
समिति को मिले हैं 6,500 सुझाव
सरकार के 23 जुलाई को यूनियन बजट में डायरेक्ट टैक्स कोड के रिव्यू के ऐलान के बाद एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन हो गया था। इस समिति को 6,500 से ज्यादा सुझाव मिले थे। इन पर विचार किया जा रहा है। टैक्स एक्सपर्ट्स की नजरें डायरेक्ट टैक्स कोड को लेकर यूनियन बजट में होने वाले ऐलान पर टिकी हैं। अगर पहले चरण के टैक्स रिफॉर्म्स में वित्तमंत्री बड़े ऐलान करती हैं तो इसका पॉजिटिव असर स्टॉक मार्केट पर भी पड़ेगा।
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नए टैक्स कोड से कंप्लायंस बढ़ेगा
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स के नियम काफी पुराने हैं। इनकी लैंग्वेज काफी मुश्किल है। इनमें दूसरे तरह की भी कई जटिलताएं हैं। अगर इन्हें आसान बना दिया जाता है तो कंप्लायंस में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी। इससे ज्यादा लोग टैक्स नेटवर्क के दायरे में आएंगे। इससे सरकार का रेवेन्यू भी बढ़ेगा।