इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले लोगों को यूनियन बजट 2025 में अच्छी खबर मिल सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने का ऐलान कर सकती हैं। इससे इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर टैक्स की लायबिलिटी कम हो जाएगी।
अभी कितनी है सेक्शन 80सी की लिमिट?
अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी (Income tax act section 80c) की लिमिट 1.5 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि कोई टैक्सपेयर एक वित्त वर्ष में 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक इनवेस्ट कर इनकम टैक्स में डिडक्शन क्लेम कर सकता है। इससे उसकी टैक्स-लायबिलिटी कम हो जाती है। सरकार ने अंतिम बार 204 में इस लिमिट में बदलाव किया था। इसका मतलब है कि इस लिमिट में पिछले 10 साल में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कितनी हो सकती है सेक्शन 80सी की नई लिमिट?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2025 में सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने का ऐलान कर सकती हैं। इसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये करने का ऐलान वित्तमंत्री कर सकती हैं। इससे इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को काफी फायदा होगा। उनकी टैक्स लायबिलिटी कम हो जाएगी। मुंबई की कॉरपोरेट लीगल काउंसल ख्याति अमलानी ने कहा कि सेक्सन 80सी की मौजूदा 1.5 लाख रुपये की लिमिट पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, "सरकार ने अंतिम बार इस लिमिट को 2014-15 में बढ़ाया था। इस लिमिट को बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये करने की जरूरत है।"
सेक्शन 80सी के क्या-क्या फायदें हैं?
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं। इसके अलावा दो बच्चों तक की ट्यूशन फीस पर भी डिडक्शन मिलता है। लंबे समय से सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाला डिडक्शन टैक्सपेयर्स के सेविंग्स और इनवेस्टमेंट करने का एक बड़ा कारण रहा है। इसकी वजह यह है कि इसके तहत जो इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं, उनमें कुछ ऑप्शंस बहुत अट्रैक्टिव हैं। उदाहरण के लिए PPF और म्यूचुअल फंड्स की टैक्स सेविंग्स में रेगुलेर निवेश करने से लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इस फंड का इस्तेमाल रिटायरमेंट बाद के खर्चों, बच्चों के हायर एजुकेशन या उनके शादी-ब्याह के लिए किया जा सकता है।
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सेक्शन 80सी के तहत कौन-कौन से इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं?
सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं, जिनमें पीपीएफ, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) आदि शामिल हैं। ELSS में निवेश पर बहुत अच्छा रिटर्न मिलता है। उधर, पीपीएफ भी लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने के लिहाज से बहुत अट्रैक्टिव है। इनमें निवेश करने पर एक तरफ लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है तो दूसरी तरफ डिडक्शन का फायदा मिलता है। इससे टैक्स लायबिलिटी काफी कम हो जाती है।