स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की कीमतों में कमी आ सकती है। हैंडसेट और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बनाने वाली कंपनियों ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स के इंपोर्ट टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव करने की सलाह दी है। उन्होंने वित्तमंत्री से पीसीबीए, एफपीसी, कैमरा मॉड्यूल और कनेक्टर्स पर इंपोर्ट ड्यूटी 2.5 फीसदी से घटाकर जीरो करने की सलाह दी है। अगर वित्तमंत्री यह सलाह मान लेती हैं तो स्मॉर्टफोन सहित कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में कमी आ सकती है।
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने कहा है कि सब-एंसेंबलीज और उनके कंपोनेंट्स पर ज्यादा टैरिफ की वजह से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका असर ग्लोबल मार्केट्स में इंडियन प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर पड़ता है। आईसीईओ का कहना है कि अगर सरकार जीरो टैरिफ स्ट्रक्चर की उनकी मांग मान लेती है तो इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
ICEA के चेयरमैन पंकज महिंद्रू ने कहा कि इंडिया में अभी जो टैरिफ स्ट्रक्चर है, वह काफी जटिल है। अभी 0 फीसदी, 2.5 फीसदी, 5 फीसदी, 7.5 फीसदी, 10 फीसदी और 15 फीासदी जैसे कई रेट्स हैं। इसके अलावा सरचार्ज भी लगता है। इसके चलते खासकर सब-एंसेंबलीज और कंपोनेंट्स पर इसके असर से ग्लोबल मार्केट्स में इंडियन प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट जाती है। इसका असर एक्सपोर्ट पर पड़ता है। अगर इंडिया खुद को दुनिया में मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना चाहता है तो उसे टैरिफ स्ट्रक्चर की कमियां दूर करनी होगी।
एसोसिएशन ने सरकार से कार डिस्प्ले इनपुट्स पर लेवी घटाने की गुजारिश की है। उनका कहना है कि सरकार को इसे 15 फीसदी से घटाकर जीरो कर देना चाहिए। इसके अलावा बीएलयू, कवर ग्लास और ओपन सेल्स पर भी ड्यूटी में कमी होनी चाहिए। इससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट पेश करेंगी। उम्मीद है कि वह एसोसिएशन की मांग को ध्यान में रख टैरिफ स्ट्रक्चर को आसान बनाने के ऐलान करेंगी।