वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को यूनियन बजट पेश कर सकती हैं। पिछले यूनियन बजट में उन्होंने इनकम टैक्स में बड़े रिफॉर्म का ऐलान किया था। उन्होंने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी। इससे टैक्सपेयर्स की उम्मीदें 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से बढ़ गई हैं।
1 अप्रैल से लागू होगा इनकम टैक्स एक्ट, 2025
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स के लिहाज से यह साल खास है। दशकों से चले आ रहे इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का वजूद खत्म होने जा रहा है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 इसकी जगह लेने जा रहा है। नया एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो जाएगा। सरकार साफ कर चुकी है कि इनकम टैक्स के नए एक्ट में टैक्स के नियमों में बुनियादी बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का फोकस टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर रहा है।
नए इनकम टैक्स एक्ट से टैक्सपेयर्स को होंगे ये फायदें
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की भाषा काफी जटिल थी। उसे किसी आम टैक्सपेयर्स के लिए समझना आसान नहीं था। टैक्स एक्सपर्ट्स या सीए की मदद के बगैर टैक्स के नियमों को समझना मुश्किल था। सरकार ने नए एक्ट में यह कमी दूर कर दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टैक्स कंप्लायंस बढ़ेगा। अभी नियम समझ में नहीं आने की वजह से कई लोग कंप्लायंस में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं।
नई रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ सकती है
टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को टैक्स के नियमों को आसान बनाने के लिए बड़े ऐलान करेंगी। ये ऐलान इनकम टैक्स एक्ट, 2025 से जुड़े होंगे। 2024 के बजट में उन्होंने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव किया था। 2025 के यूनियन बजट में 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी थी। इससे टैक्स सिस्टम पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री इस बार नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन की लिमिट 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती हैं। इससे 5 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों को रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।
एलटीसीजी की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ सकती है
वित्तमंत्री ने 2024 में कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि वह शेयरों और म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर सकती हैं। इससे म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम और शेयरों में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। देश की आबादी का अभी काफी छोटा हिस्सा शेयरों और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करता है।