Budget 2026: आम बजट में कैपेक्स 10% बढ़ने की उम्मीद, इंफ्रास्ट्रक्चर को तय करना है लंबा रास्ता- L&T CFO

Budget 2026: रमन के मुताबिक, अगर भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बड़ी भूमिका निभानी होगी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की संख्या में पहले ही उछाल आया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट 1 फरवरी 2026 को पेश हो सकता है

अपडेटेड Jan 04, 2026 पर 4:08 PM
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वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में कैपेक्स के लिए 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई गई थी।

लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) आर शंकर रमन को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश होने वाले बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) 10 प्रतिशत बढ़ सकता है।रमन ने कहा कि उन्हें सरकार के उच्च खर्च के कारण प्राइवेट इनवेस्टमेंट के लिए संसाधनों की कमी का डर नहीं है। सिस्टम में पर्याप्त नकदी इस तरह के निवेश को सपोर्ट करेगी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रमन का कहना है, ''अगर भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बड़ी भूमिका निभानी होगी। मुझे लगता है कि सरकार को यह बात पता है। मुझे उम्मीद है कि वह इसके लिए बजट में पर्याप्त फंड एलोकेट करेगी।''

वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में कैपेक्स के लिए 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई गई थी। रमन ने कहा कि नया बजट 2026 इसी तर्ज पर होगा। उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कैपेक्स में 10 प्रतिशत की वृद्धि करेंगी। रमन ने कहा कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की संख्या में पहले ही उछाल आया है, और इंफ्रास्ट्रक्चर को अभी लंबा रास्ता तय करना है। हालांकि, उन्होंने अफसोस जताया कि कभी-कभी प्रोजेक्ट सबसे कम बोली लगाने वाले को सौंप दिए जाते हैं, जो तकनीकी रूप से बेस्ट तैयारी नहीं रखते हैं। इससे काम पूरा होने में देरी होती है।

रमन ने कहा कि सरकार ने सभी विभागों से क्वालिटी बेस्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म अपनाने की सिफारिश की है, इसके तहत प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने और अन्य पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक बोली की कीमत और किसी एंटिटी की समय पर काम पूरा करने की क्षमता जैसे दूसरे पहलुओं के बीच संतुलन बना रहता है, तब तक अच्छी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे।


मैनपावर को लेकर चुनौतियां अभी भी बरकरार

मैनपावर की कमी को लेकर रमन ने कहा कि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। विकल्पों की उपलब्धता के कारण कंस्ट्रक्शन का काम कम पसंद किया जाने वाला पेशा बन गया है। इसके अलावा सरकार की ओर से 125 दिनों तक रोजगार देने के वादे के कारण, लोग अपने मूल स्थान से दूर जाने से पहले दो बार सोचते हैं। रमन ने कहा कि महामारी ने लोगों की सोच बदल दी है, क्योंकि लॉकडाउन के बाद संकट के समय उन्हें अपने घरों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही थी। इससे भी सोच में कुछ बदलाव आया है।

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तो फिर क्या है उपाय

L&T के CFO ने कहा, "इसका सबसे अच्छा उपाय यह होगा कि प्रोजेक्ट्स को उनके रहने की जगहों के करीब लाया जाए, जिसका मतलब है कि आपको देश के अंदरूनी हिस्सों में जाना होगा। मुझे लगता है कि सरकार यही कर रही है, और हम सभी भी यही करने की कोशिश कर रहे हैं।" प्राइवेट कैपिटल खर्च के मोर्चे पर रमन का कहना है कि ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट, स्टील, मिनरल्स और मेटल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स की कंपनियां अभी निवेश कर रही हैं।

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