Budget 2026: डिसइनफ्लेशन और डिफ्लेशन के बीच आप अक्सर कनफ्यूज्ड हो जाते हैं? यहां जानिए दोनों में क्या फर्क है

Budget 2026: इनफ्लेशन का ठीक उल्टा है डिफ्लेशन। ज्यादातर देशों में इनफ्लेशन की स्थिति होती है। कुछ देशों में डिफ्लेशन की स्थिति होती है। जब किसी खास पीरियड में चीजों या सेवाओं की कीमतें बढ़ने की जगह घटती हैं तो उसे डिफ्लेशन की स्थिति कहा जाता है

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 8:42 AM
Story continues below Advertisement
यूनियन बजट से पहले अक्सर इनफ्लेशन, डिफ्लेशन और डिसइनफ्लेशन की चर्चा सुनने को मिलती है।

Budget 2026: कई लोग डिसइनफ्लेशन और डिफ्लेशन के बीच के फर्क को समझ नहीं पाते। यूनियन बजट से पहले अक्सर इनफ्लेशन, डिफ्लेशन और डिसइनफ्लेशन की चर्चा सुनने को मिलती है। इसकी वजह यह है कि इनका संबंध इकोनॉमी से है। इकोनॉमी की ग्रोथ, सरकार की वित्तीय स्थिति, चीजों की महंगाई आदि पर इनका सीधा असर पड़ता है।

डिफ्लेशन का मतलब

इनफ्लेशन का ठीक उल्टा है डिफ्लेशन। इनफ्लेशन में किसी इकोनॉमी में चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। उदाहरण के लिए भारत में हर महीने के इनफ्लेशन के डेटा जारी होते है। रिटेल इनफ्लेशन के डेटा से पता चलता है कि एक साल पहले के मुकाबले किसी महीने में महंगाई कितनी बढ़ी है। ज्यादातर देशों में इनफ्लेशन की स्थिति होती है। कुछ देशों में डिफ्लेशन की स्थिति होती है। जब किसी खास पीरियड में चीजों या सेवाओं की कीमतें बढ़ने की जगह घटती हैं तो उसे डिफ्लेशन की स्थिति कहा जाता है।


डिफ्लेशन की वजह

इकोनॉमी में जब लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे की कमी हो जाती है तो डिफ्लेशन की स्थिति देखने को मिलती है। लोगों के खर्च नहीं करने से कंजम्प्शन घटने लगता है। ऐसे में मैन्युफैक्चरर्स चीजों की कीमतें घटाकर उनकी डिमांड बढ़ाने की कोशिश करते हैं। कोविड के बाद से चीन में डिफ्लेशन की स्थिति देखने को मिली है। वहां चीजों की कीमतें बढ़ने की जगह घट रही हैं। चीन के रियल एस्टेट सेक्टर के संकट में फंसने का असर लोगों की इनकम पर पड़ा है। इससे वे कम खर्च कर रहे हैं।

डिसइनफ्लेशन का मतलब

वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की रफ्तार जब बहुत सुस्त पड़ जाती है तो उसे डिसइनफ्लेशन की स्थिति कहते हैं। इसे इकोनॉमी के लिए अच्छा माना जाता है। खासकर जब इकोनॉमी में हाई इनफ्लेशन के बाद डिसइनफ्लेशन की स्थिति बनती है तो उसे पॉजिटिव माना जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि इकोनॉमी में वस्तुओं और सेवाएं की कीमतों पर दबाव घट रहा है। इसका सबसे ज्यादा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को होता है।

कीमतों पर नजर रखने की जिम्मेदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी देश के केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी इनफ्लेशन को काबू में रखने की होती है। इसके लिए उसके पास कई तरह के टूल्स होते है। इकोनॉमी की स्थिति और इनफ्लेशन बढ़ने की वजह को देखते हुए वह सही टूल का इस्तेमाल करता है। भारत में RBI इनफ्लेशन पर करीबी नजर रखता है। वह इनफ्लेशन के डेटा के हिसाब से अपनी मॉनेटरी पॉलिसी तय करता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।