यूनियन बजट 2026 ऐसे वक्त आ रहा है, जब भारत के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया है। इसका असर इंडिया के एक्सपोर्ट पर दिखने लगा है। ट्रंप ने उस बिल को एप्रूव कर दिया है, जिसके अमेरिकी कांग्रेस में पारित होने के बाद उन्हें भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। इसका सीधा असर इंडियन एक्सपोर्टर्स खासकर एमएसएमई पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के सामने राहत के उपायों के साथ सरकार के घाटे को कंट्रोल में रखने की इस बार बड़ी चुनौती है।
एक्सपोर्टर्स के लिए इनसेंटिव स्कीम का ऐलान
अमेरिकी टैरिफ के खराब असर से एक्सपोर्ट्स खासकर एमएसएमई को बचाने के लिए सरकार पहले ही एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का ऐलान कर चुकी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फोकस एक्सपोर्ट डायवर्फिफिकेशन पर है। नए बाजार की तलाश और दूसरे देशों को निर्यात बढ़ाकर अमेरिकी एक्सपोर्ट में आई कमी की कुछ हद तक भरपाई की जा सकती है। सरकार इसके लिए नई इनसेंटिव स्कीम का ऐलान बजट में कर सकती है। लेकिन, सरकार को यह ध्यान में रखना होगा कि ऐसी स्कीम का असर सरकार की वित्तीय सेहत पर नहीं पड़ना चाहिए।
इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने पर होगा फोकस
सरकार यूनियन बजट में घरेलू इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के उपायों का ऐलान कर सकती है। डिमांड और कंजम्प्शन बढ़ने से इकोनॉमी की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, सरकार पहले ही सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर चुकी है। जीएसटी में बड़ा रिफॉर्म्स कर चुकी है। इससे 300 से ज्यादा चीजों की कीमतों में कमी आई है। 21 सितंबर से जीएसटी के नए रेट्स लागू हो चुके हैं। अगर सरकार डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में और राहत देती है तो इसका सरकार के रेवेन्यू पर खराब असर पड़ेगा।
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4 फीसदी तय हो सकता है
पिछले कुछ सालों में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट कम करने पर फोकस बढ़ाया है। कोविड के समय फिस्कल डेफिसिट 9.5 फीसदी तक पहुंच गया था। लेकिन, FY24 से इसमें कमी आ रही है। FY24 में यह 5.6 फीसदी था, जो FY25 में घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया। इस वित्त वर्ष में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट 4.4 फीसदी तक रखने का लक्ष्य तय किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस लक्ष्य के हासिल हो जाने की उम्मीद है। सरकार यूनियन बजट 2026 में अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट को 4 फीसदी तक लाने का टारगेट तय कर सकती है।
फिस्कल डेफिसिट बढ़ने का पड़ेगा खराब असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार यूनियन बजट में राहत के उपायों पर फोकस बढ़ाती है तो इससे फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है। फिस्कल डेफिसिट बढ़ने का मतलब है कि सरकार को बाजार से ज्यादा कर्ज लेना पड़ेगा। इससे सरकार के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा कर्ज का इंटरेस्ट चुकाने पर चला जाएगा। इसलिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को यूनियन बजट में राहत के उपायों और सरकार के कर्ज के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।