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Budget 2026: निर्मला सीतारमण के सामने आम आदमी को राहत और सरकार के घाटे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती

पिछले कुछ सालों में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट कम करने पर फोकस बढ़ाया है। कोविड के समय फिस्कल डेफिसिट 9.5 फीसदी तक पहुंच गया था। लेकिन, FY24 से इसमें कमी आ रही है। FY24 में यह 5.6 फीसदी था, जो FY25 में घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 13, 2026 पर 9:40 PM
Budget 2026: निर्मला सीतारमण के सामने आम आदमी को राहत और सरकार के घाटे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती
सरकार यूनियन बजट में घरेलू इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने के उपायों का ऐलान कर सकती है।

यूनियन बजट 2026 ऐसे वक्त आ रहा है, जब भारत के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया है। इसका असर इंडिया के एक्सपोर्ट पर दिखने लगा है। ट्रंप ने उस बिल को एप्रूव कर दिया है, जिसके अमेरिकी कांग्रेस में पारित होने के बाद उन्हें भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। इसका सीधा असर इंडियन एक्सपोर्टर्स खासकर एमएसएमई पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के सामने राहत के उपायों के साथ सरकार के घाटे को कंट्रोल में रखने की इस बार बड़ी चुनौती है।

एक्सपोर्टर्स के लिए इनसेंटिव स्कीम का ऐलान

अमेरिकी टैरिफ के खराब असर से एक्सपोर्ट्स खासकर एमएसएमई को बचाने के लिए सरकार पहले ही एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का ऐलान कर चुकी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फोकस एक्सपोर्ट डायवर्फिफिकेशन पर है। नए बाजार की तलाश और दूसरे देशों को निर्यात बढ़ाकर अमेरिकी एक्सपोर्ट में आई कमी की कुछ हद तक भरपाई की जा सकती है। सरकार इसके लिए नई इनसेंटिव स्कीम का ऐलान बजट में कर सकती है। लेकिन, सरकार को यह ध्यान में रखना होगा कि ऐसी स्कीम का असर सरकार की वित्तीय सेहत पर नहीं पड़ना चाहिए।

इकोनॉमी में डिमांड बढ़ाने पर होगा फोकस

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