देश के 80वें बजट की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन इस बार तारीख को लेकर सस्पेंस है। क्योंकि, साल 2026 में 1 फरवरी को रविवार है और उसी दिन गुरु रविदास जयंती भी है। सरकारी अधिकारियों ने PTI को बताया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2027 के लिए यूनियन बजट रविवार, 1 फरवरी को पेश करने की उम्मीद है। इस तारीख को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि 2026 में भी 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है। इस वजह से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या देश की सबसे अहम सालाना प्रक्रिया मानी जाने वाली बजट प्रस्तुति के लिए संसद को वीकेंड पर बुलाया जाएगा या फिर तारीख में कोई बदलाव किया जाएगा।
अब बजट पेश करने की तारीख 1 फरवरी तय कर दी गई है, ताकि संसद को 1 अप्रैल से पहले बजट प्रस्तावों पर चर्चा करने, उनकी जांच करने और उन्हें मंज़ूरी देने के लिए पूरा समय मिल सके। इससे मंत्रालयों और विभागों को योजनाओं और खर्च से जुड़े फैसलों को बिना देरी के लागू करने में मदद मिलती है। अधिकारियों के मुताबिक, आम बजट की तारीख अब स्थायी रूप से तय हो चुकी है और यह ब्रिटिश शासन के समय चली आ रही पुरानी परंपरा से अलग है। यह बदलाव बजट की प्रक्रिया को ज़्यादा आसान, व्यावहारिक और समय पर लागू करने के लिए किया गया था।
बजट 2026: तारीख और समय
जब यह सवाल पूछा गया कि क्या यूनियन बजट रविवार को पेश किया जा सकता है, तो संसदीय मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों का निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति करती है। इससे साफ है कि वीकेंड पर बजट पेश करना एक विकल्प तो है, लेकिन इसका अंतिम फैसला बजट सत्र के नज़दीक लिया जाएगा। जहां तक समय की बात है, यूनियन बजट आमतौर पर हर साल लोकसभा में सुबह 11 बजे पेश किया जाता है, हालांकि इस बार का सटीक समय अभी तय नहीं किया गया है।
यूनियन बजट क्यों अहम होता है?
यूनियन बजट देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी होता है। यह तय करता है कि सरकार पैसा कहां और कैसे खर्च करेगी, महंगाई को कैसे काबू में रखेगी और टैक्स सिस्टम को किस तरह बदलेगी। इसी बजट में इनकम टैक्स स्लैब तय होते हैं, टैक्स की दरों में बदलाव होता है और नई नीतियों की घोषणा की जाती है। इन फैसलों का असर आम लोगों, कारोबारियों और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि यूनियन बजट हर साल सबसे ज़्यादा ध्यान से देखा और समझा जाने वाला सरकारी एलान होता है।
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