अगले वित्त वर्ष के यूनियन बजट में भी टैक्स रिफॉर्म्स पर सरकार का फोकस बना रहेगा। पिछले कुछ सालों में टैक्स रिफॉर्म्स पर सरकार का जोर रहा है। इसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों टैक्स शामिल हैं। इसके अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। डिमांड बढ़ने से कंजम्प्शन बढ़ा है। इसका पॉजिटिव असर जीडीपी ग्रोथ पर पड़ा है।
टैक्स रिफॉर्म्स से कंज्यूमर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि Union Budget 2026 टैक्स रिफॉर्म्स को जारी रखने के लिए बड़ा मौका है। खासकर तब जब जीडीपी में प्राइवेट कंजम्प्शन की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी तक बढ़ गई है। टैक्स रिफॉर्म्स से कंज्यूमर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में वैश्विक चुनौतियों के बावजूद इंडिया की जीडीपी ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसका असर एक्सपोर्ट पर पड़ा।
टैक्स में राहत से कंजम्प्शन को बढ़ावा मिला है
सरकार ने डायरेक्ट टैक्स में बड़े रिफॉर्म्स का ऐलान यूनियन बजट 2025 में किया। उसने इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्स फ्री इनकम की लिमिट 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी। इससे टैक्सपेयर्स खासकर मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को काफी फायदा हुआ। इससे टैक्सपेयर्स की जेब में करीब 2 लाख करोड़ रुपये बचने का अनुमान है। टैक्सपेयर्स यह पैसे कारों, होम अप्लायंसेज, रियल एस्टेट पर खर्च कर रहे हैं, जिससे इकोनॉमी में कंजम्प्शन बढ़ा है।
जीएसटी 2.0 इनडायरेक्ट टैक्स में बड़ा रिफॉर्म
इनडायरेक्ट टैक्स में भी सरकार ने इस साल बड़ा रिफॉर्म्स किया। इसके तहत जीएसटी के स्लैब की संख्या कम की गई। स्लैब की संख्या घटने से 300 से ज्याटा आइटम्स पर जीएसटी में कमी आई है। इससे कार, स्कूटर, मोटरसाइकिल और होम अप्लायंसेज जैसी चीजों की डिमांड बढ़ी है। इससे इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ अच्छी रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2026 में भी जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में सरकार रिफॉर्म्स के उपायों से इकोनॉमी की तेज ग्रोथ को बनाए रख सकती है।
छोटे बिजनेसेज के लिए नियमों को आसान बनाने की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी फोकस बढ़ाया है। लेकिन, कंप्लायंस को लेकर अब भी कई तरह की दिक्कतें बनी हुई है। कई छोटे बिजनेसेज का कहना है कि कंप्लायंस पर उनका काफी पैसा खर्च हो जाता है। सरकार को ऐसे छोटे बिजनेसेज के लिए जीएसटी के नियमों को आसान बनाने की जरूरत है। इसके अलावा सरकार सभी राज्यों में जीएसटी ऐपेलेट ट्राइब्यूनल की शुरुआत कर सकतकी है। इससे जीएसटी के विवादित मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा। इससे निवेश में बिजनेसेज की दिलचस्पी बढ़ेगी।