Budget 2026: 1 फरवरी को क्यों पेश होता है बजट? आखिर सरकार ने क्यों बदली बजट पेश करने की तारीख

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। आज यह तारीख सामान्य लगती है, लेकिन कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। लंबे समय तक बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा और इसके पीछे ब्रिटिश दौर की परंपराएं थीं

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 6:19 PM
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Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी।

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। आज यह तारीख सामान्य लगती है, लेकिन कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। लंबे समय तक बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा और इसके पीछे ब्रिटिश दौर की परंपराएं थीं। समय के साथ इन परंपराओं में बदलाव हुए, ताकि बजट प्रक्रिया ज्यादा व्यावहारिक और देश की जरूरतों के अनुरूप बन सके।

28 फरवरी से 1 फरवरी तक का सफर

2017 से पहले तक केंद्रीय बजट फरवरी के आखिरी दिन यानी 28 फरवरी को पेश होता था। यह परंपरा अंग्रेजों के शासन काल से चली आ रही थी। दिक्कत यह थी कि बजट के ऐलान और उसके लागू होने (1 अप्रैल) के बीच बहुत कम समय मिलता था। इससे राज्यों और मंत्रालयों को नई योजनाएं लागू करने में परेशानी होती थी।


इस समस्या को देखते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट को फरवरी की शुरुआत में पेश करने का फैसला लिया। 2017 से बजट 1 फरवरी को आने लगा, जिससे सरकार और राज्यों को तैयारी के लिए ज्यादा समय मिलने लगा और ब्रिटिश काल की एक पुरानी परंपरा भी खत्म हुई।

बजट शाम 5 बजे नहीं, सुबह 11 बजे क्यों?

आज बजट सुबह 11 बजे पेश होता है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। 1999 तक बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह भी ब्रिटिश दौर की विरासत थी। ब्रिटेन में बजट सुबह 11 बजे आता था, जो भारतीय समय के हिसाब से शाम 5 बजे होता था। आज़ादी के बाद भी भारत में यही समय चलता रहा।

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे बदलने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि सुबह बजट पेश होने से सांसदों, विशेषज्ञों और आम लोगों को प्रावधान समझने और चर्चा करने के लिए पूरा दिन मिलेगा। तब से बजट सुबह 11 बजे ही पेश किया जा रहा है।

रेलवे बजट की अलग पहचान भी खत्म

2017 में एक और बड़ा बदलाव हुआ। करीब 92 साल पुरानी परंपरा को खत्म करते हुए रेलवे बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया गया। पहले रेलवे बजट आम बजट से दो दिन पहले अलग पेश होता था। इसे एकीकृत करने से बजट प्रक्रिया सरल हुई और सरकारी खर्च की तस्वीर एक जगह साफ दिखने लगी।

क्यों अहम हैं ये बदलाव?

बजट की तारीख और समय में हुए ये बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं थे। इनका मकसद बजट को ज्यादा प्रभावी, समय पर लागू होने योग्य और आधुनिक प्रशासन के अनुरूप बनाना था। आज 1 फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश होना उसी सोच का नतीजा है—जहां परंपरा से आगे बढ़कर व्यवहारिक सुधार को प्राथमिकता दी गई।

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