पैतृक संपत्ति पर बेटी के अधिकार को लेकर अक्सर बातें होती रहती हैं। बेटी के विवाहित होने पर उलझन और बढ़ जाती है। हालांकि, सरकार ने हिंदू सक्सेशन एक्ट में 2005 में संशोधन किया था, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। इस बारे में नोएडा के प्रशांत लाल ने एक सवाल पूछा है। उन्होंने बताया है कि उनकी एक बेटी और एक बेटा हैं। उनकी एक विवाहित बहन है। उनके पिता का देहांत 2000 के पहले हो गया था। बहन की शादी 1999 में हो गई। उनका सवाल है कि पिता की संपत्ति के बंटवारे में क्या उनकी विवाहित बहन का भी हक है? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।
हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में संशोधन
जैन ने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में 2005 में संशोधन हुआ था। इसके बाद संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक है, जितना बेटे का है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी विवाहित है या अविवाहित है। बेटी एचयूएफ की संपत्ति के बंटवारे में अपना हिस्सा मांगने की हकदार है। हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 का यह संशोधन 9 सितंबर, 2005 को लागू हो गया। इसका मतलब है कि अगर बेटी 9 सितंबर, 2005 को जीवित थी तो संपत्ति में उसका भी हिस्सा है।
9 सितंबर, 2005 को लागू हुआ यह संशोधन
उन्होंने कहा कि उस तारीख को (9 सितंबर, 2005) बेटी के पिता का जीवित होना जरूरी नहीं है। इसकी वजह यह है कि संपत्ति में बेटी का बराबर का हक उसके जन्म से जुड़ा है। जन्म लेने के साथ ही बेटी संपत्ति में बराबर की हकदार बन जाती है। चूंकि, प्रशांत लाल के मामले में उनकी बहन 9 सितंबर, 2005 को जीवित थी, जिससे वह उनके पिता के एचयूएफ की संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार है।
बेटी चाहे तो अपना हिस्सा छोड़ सकती है
जैन ने कहा कि प्रशांत के पिता की संपत्ति तीन बराबर हिस्सों में बंटेगी। इसे प्रशांत की मां, प्रशांत और उनकी बहन के बीच बांटा जाएगा। बंटवारे के समय हिस्सा बराबर होना जरूरी नहीं है, क्योंकि तीनों हिस्सेदारों की सहमति से संपत्ति का असमान बंटवारा भी हो सकता है। प्रशांत की बहन अगर चाहें तो अपना हिस्सा छोड़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मान्यता के लिए एचयूएफ की पूरी संपत्ति का बंटवारा होना जरूरी है। फुल पार्टिशन की ऑर्डर की रिकॉर्डिंग ज्यूरिडिक्शनल इनकम टैक्स अफसर से लेना जरूरी होगा।