Budget 2026: कहां से आया ये शब्द 'बजट', मजाक-मजाक में पड़ गया नाम! बड़ी मजेदार है पूरी कहानी

Budget History: बजट का सीधा संबंध किसी गणित के आंकड़े से नहीं, बल्कि एक चमड़े के बैग से है? जी हां, बजट का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी। कल का 'चमड़े का थैला' आज का डिजिटल टैबलेट बन चुका है। भले ही तकनीक बदल गई हो, लेकिन बजट की महत्ता आज भी वैसी ही है, जो किसी भी देश के विकास और भविष्य की दिशा तय करता है

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 6:34 PM
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Budget 2026: कहां से आया ये शब्द 'बजट', मजाक-मजाक में पड़ गया नाम (PHOTO-AI)

हर साल जब वित्त मंत्री संसद में देश का लेखा-जोखा पेश करते हैं, तो पूरी दुनिया की नजरें 'बजट' पर टिकी होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस 'बजट' शब्द को आज हम अर्थव्यवस्था की धुरी मानते हैं, वो कहां से आया और कैसे मजाक-मजाक में ये शब्द आज हर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया। बजट का सीधा संबंध किसी गणित के आंकड़े से नहीं, बल्कि एक चमड़े के बैग से है? जी हां, बजट का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी।

फ्रांसीसी शब्द 'बुजेट' से हुई उत्पत्ति

बजट शब्द की जड़ें फ्रांसीसी भाषा के शब्द 'बुजेट' (Bougette) में छिपी हैं। प्राचीन काल में इसका मतलब होता था- "चमड़े का छोटा थैला"। समय के साथ यह शब्द अंग्रेजी में 'बजट' के रूप में मशहूर हुआ।


दरअसल, यह परंपरा ब्रिटेन से शुरू हुई। जब वहां के वित्त मंत्री संसद में अपनी आय-व्यय की फाइलें पेश करने पहुंचते थे, तो वे उन्हें एक चमड़े के थैले में रखकर लाते थे। जब वे दस्तावेज निकालने के लिए बैग खोलते, तो संसद में लोग हंसी-मजाक में कहते थे- "बजट खुल गया"। देखते ही देखते सरकारी खर्चों के विवरण के लिए यही शब्द आधिकारिक बन गया।

रॉबर्ट वॉलपोल ने रखा था आधुनिक बजट का आधार

दुनिया के पहले औपचारिक बजट का श्रेय ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री सर रॉबर्ट वॉलपोल को जाता है। उन्होंने साल 1733 में पहली बार संसद के सामने देश के खर्चों और टैक्स का विवरण पेश किया था।

हालांकि, बजट की नींव 1215 के 'मैग्ना कार्टा' समझौते के समय ही पड़ गई थी, जिसने राजाओं के लिए जनता पर टैक्स लगाने से पहले संसद की अनुमति अनिवार्य कर दी थी।

भारत में जेम्स विल्सन ने शुरू की परंपरा

भारत में बजट की शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान हुई। देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के वित्त सदस्य जेम्स विल्सन ने पेश किया था। यही कारण है कि विल्सन को 'भारतीय बजट का जनक' कहा जाता है।

ब्रीफकेस से 'बहीखाता' और अब डिजिटल टैबलेट तक का सफर

बजट के साथ कई रोचक परंपराएं भी जुड़ी हैं:

  • सूटकेस का अंत: दशकों तक वित्त मंत्रियों ने हाथ में लाल या काले रंग का ब्रीफकेस लेकर फोटो खिंचवाने की ब्रिटिश परंपरा को निभाया।
  • फिर आया बहीखाता: साल 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदला और बजट को लाल कपड़े में लिपटे 'बहीखाता' के रूप में पेश किया।
  • डिजिटल इंडिया का डिजिटल बजट: साल 2021 से भारत का बजट पूरी तरह पेपरलेस हो गया है। अब वित्त मंत्री टैबलेट के जरिए बजट पढ़ती हैं।

हलवा सेरेमनी का अलग महत्व

बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए छपाई से पहले वित्त मंत्रालय में 'हलवा सेरेमनी' होती है, जिसके बाद अधिकारी बजट पेश होने तक बाहरी दुनिया से कट जाते हैं।

कल का 'चमड़े का थैला' आज का डिजिटल टैबलेट बन चुका है। भले ही तकनीक बदल गई हो, लेकिन बजट की महत्ता आज भी वैसी ही है, जो किसी भी देश के विकास और भविष्य की दिशा तय करता है।

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