Union Budget 2025: इनकम टैक्स के नियम होंगे आसान, निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को करेंगी ये ऐलान

पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी यूनियन बजट में सरकार इनकम टैक्स नियमों को आसान बनाने का ऐलान करेगी। पिछले साल सरकार ने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव किए थे। इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने की कोशिश की थी। इस बार भी बजट में इस कोशिश के जारी रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Jan 23, 2025 पर 9:59 AM
Story continues below Advertisement
इनकम टैक्स नियमों को आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।

पिछले कुछ सालों की तरह यूनियन बजट 2025 में भी सरकार का फोकस इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर रह सकता है। सरकार धीरे-धीरे इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव करना चाहती है। सरकार कैपिटल गेंस टैक्स और विदहोल्डिंग टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव कर चुकी है। सरकार बगैर डिडक्शन वाली इनकम टैक्स की नई रीजीम भी पेश कर चुकी है। 1 फरवरी को पेश होने वाले यूनियन बजट में टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स के नियमों में ऐसे बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं, जिससे ओल्ड रीजीम में उनकी दिलचस्पी घट सकती है।

नई रीजीम में स्लैब में बदलाव

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) नई टैक्स रीजीम में टैक्स स्लैब/रेट्स में बदलाव कर सकती हैं। वह ओल्ड रीजीम को जैसा है, वैसा बनाए रख सकती हैं। वह इसे खत्म करने का फैसला भी ले सकती हैं। तीसरी प्रॉपर्टी पर नोशनल रेंट के आधार पर टैक्स लगाने के वर्तमान नियम को खत्म किया जा सकता है, क्योंकि प्रॉपर्टी टैक्स पहले से लागू है। इसके अलावा नोशनल रेंट के निर्धारण के लिए कोई स्टैंडर्ड नहीं है और यह काफी जटिल प्रक्रिया है। इसलिए टैक्सपेयर पर अतिरिक्त टैक्स के इस बोझ को सरकार खत्म कर सकती है।


पेपरवर्क घटाने के उपाय

टैक्स के नियम जटिल होने से टैक्सपेयर्स का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। उन्हें कई तरह के पेपरवर्क करने होते हैं। टैक्स के जटिल प्रावधानों को समझना पड़ता है। कुई मामलों में टैक्स कंसल्टेंट तक की सेवाएं लेनी पड़ती है। अभी इनकम टैक्स अथॉरिटीज पर काम का काफी बोझ है। उन्हें टैक्सपेयर्स के क्लेम और टैक्स फाइलिंग को वेरिफाइ करना पड़ता है। एसेसमेंट, डिमांड, रिफंड आदि का ट्रैक रखना पड़ता है। कंप्लायंस की यह पक्रिया बहुत महंगी साबित होती है, क्योंकि इसके मुकाबले टैक्स कलेक्शन कम होता है।

एनआरआई के लिए आसान नियम

सरकार एनआरआई के टैक्स नियमों को भी आसान बना सकती है। अभी मकानमालिक एनआरआई होने की स्थिति में किराएदार को TAN लेना पड़ता है। अलग फॉर्म भरना पड़ता है। अलग लॉग-इन बनानी पड़ती है। अगर मकानमालिक एनआरआई नहीं है तो किराएदार सीधे विदहोल्डिंग टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है और अपने ई-फाइलिंग अकाउंट से ऑनलाइन टैक्स का पेमेंट कर सकता है। इसी तरह सरकार नॉन-रेजिडेंट्स जिनके पास इंडिया में आधार नहीं है और जो विदेश में रहते हैं उनके लिए 30 दिन के अंदर ITR-V के वेरिफिकेशन नियम को खत्म किया जा सकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कई देशों में अगस्त में गर्मी की छुट्टियां होती हैं।

यह भी पढ़ें: India Budget 2025: ग्रीन एनर्जी के लिए 10000 करोड़ बढ़ सकता है आवंटन, पीएम सूर्य घर के तहत घर-घर में लगेंगे सोलर पैनल

टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल

इनकम टैक्स नियमों को आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने जब से इनकम टैक्स के प्रोसेसेज में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया है, तब से यह काफी आसान हो गया है। AIS, TIS से काफी मदद मिली है। सरकार यूनियन बजट में इनकम टैक्स प्रोसेसेज में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाने का ऐलान कर सकती है।

तनु गुप्ता

(तनु गुप्ता Mainstay Tax Advisors में पार्टनर हैं)

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।