Union Budget 2026: निर्मला सीतारमण के बजट के बारे में फटाफट जानिए 10 सबसे बड़ी बातें

सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का अनुमान 4.3 फीसदी रखा है। इसका मतलब है कि सरकार का रोजकोषीय घाटा अगले वित्त वर्ष में जीडीपी का 4.3 फीसदी तक रहेगा। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.4 फीसदी तय किया था

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 3:18 PM
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सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश किया। उन्होंने टैक्सपेयर्स के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया। लेकिन, उन्होंने कई बड़े ऐलान किए। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस, सरकार की वित्तीय स्थिति बेहतर करने के उपाय और रोजगार के मौके बढ़ाने पर जोर शामिल है। आइए जानते हैं इस बजट के बारे में 10 सबसे बड़ी बातें।

1. फिस्कल डेफिसिट का अनुमान घटा

सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का अनुमान 4.3 फीसदी रखा है। इसका मतलब है कि सरकार का रोजकोषीय घाटा अगले वित्त वर्ष में जीडीपी का 4.3 फीसदी तक रहेगा। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.4 फीसदी तय किया था। इसका मतलब है कि अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट 0.1 फीसदी कम रहेगा।

2. डेट और जीडीपी रेशियो में कमी


अगले वित्त वर्ष यानी FY27 में भारत के कर्ज और जीडीपी का रेशियो घटकर 55.6 फीसदी पर आ जाने का अनुमान है। वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार को फोकस वित्त वर्ष 2031 तक इस रेशियो को 50 फीसदी तक लाने पर है।

3. कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट बढ़ा

सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा है। पहली बार पूंजीगत खर्च इस लेवल तक पहुंचेगा। इससे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड भी बनाएगी। इससे बैंकों को आंशिक क्रेडिट गारंटी मिलेगी।

4. ग्लोबल क्लाउड कंपनियों के लिए टैक्स हॉलिडे

विदेशी कंपनियां जो भारत में डेटा सेंटर के जरिए ग्लोबल क्लाउड सर्विसेज ऑफर करेंगी, उन्हें 2047 तक टैक्स हॉलिडे का फायदा मिलेगा। इसका मतलब है कि ऐसी कंपनियों को 20247 तक भारत में टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा।

5. MSME और SME के लिए सपोर्ट पैकेज

वित्तमंत्री ने बजट मे्ं एसएमई ग्रोथ फंड बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ऐलान किया। इसका इस्तेमाल 'एसएमई चैंपियंस' बनाने के लिए होगा। 2,000 करोड़ रुपये का ऐलान सेल्फ रिलायंस इंडिया फंड के लिए किया गया है। सीपीएसई को एमएसएमई को पेमेंट करने के लिए अब TReDS प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना जरूरी होगा। इसके अलावा 'कॉर्पोरेट मित्र' तैयार किए जाएंगे, जो लिक्विडिटी और कंप्लायंस में मदद करेंगे।

6. डेरिवेटिव्स पर ज्यादा एसटीटी लगेगा

अब फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर ज्यादा एसटीटी चुकाना होगा। सरकार ने फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है। ऑप्शन पर एसटीटी 0.1 से बढ़ाकर 0.15 कर दिया है।

7. बायबैक पर कैपिटल गेंस के रूप में टैक्स लगेगा

शेयर बायबैक पर अब शेयरहोल्डर्स को कैपिटल गेंस के रूप में टैक्स चुकाना होगा। प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगेगा।

8. चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर्स बनेंगे

ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डोमेस्टिक माइनिंग और क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स बनाए जाएंगे।

9. हाई स्पीड रेल एंड फ्रेट कॉरिडोर्स

सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे। ये देश के बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगें। इसके अलावा सूरत से दानकुनी के बीच एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। इससे कार्गो मूवमेंट में तेजी आएगी।

10. विदेश में एजुकेशन और मेडिकल रेमिटेंसेज पर टीसीएस घटा

एजुकेशन और इलाज के लिए लिरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। इससे पढ़ाई या इलाज के लिए विदेश पैसे भेजने वाले परिवारों को फायदा होगा।

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