Union Budget Expectations 2026: नए साल का खुमार अभी खत्म नहीं हुआ कि देश बजट के मुहाने पर आ खड़ा है। सरकार ने ऐलान कर दिया है कि 1 फरवरी को बजट पेश होगा यानी वित्त मंत्री वो खाका पेश करेंगी जिससे साल भर पूरा देश चलेगा। ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी एग्री सेक्टर निर्मला सीतारामन से उम्मीदें लगाए बैठा है। क्या हैं वो उम्मीदें और क्या है एग्री सेक्टर के सुझाव। आइए डालते है एक नजर ।
एग्री सेक्टर की बजट से उम्मीदें
पूर्व एग्री सेक्रेटरी सिराज हुसैन ने कहा कि सरकार को चाहिए कि देश में एग्री इंफ्रा को बढ़ावा मिले। बजट में वह बेहतर स्टोरेज, लॉजिस्टिक इंफ्रा का विकास और APMC को मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर देने की मांग है। एग्री सेक्टर चाहता है कि ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से APMC हों। सरकार खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़े और डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की मांग कर रहे है।
साथ ही उनका कहना है सरकार बैन एग्रीकल्चर वायदा से बैन हटाने की मांग कर रहे है। एग्रीकल्चर पर स्थाई पॉलिकी बनाने की मांग है। सरकार क्रॉप के पैटर्न पर गहन शोध करे। किसानों की आय बढ़ाने पर ज्यादा फोकस हो। MSP और फसल खरीद में सुधार और खेती की लागत कम करने पर जोर की मांग है।
शुगर सेक्टर की बजट से उम्मीदें
वहीं श्री रेणुका शुगर्स के EC अतुल चतुर्वेदी का कहना है कि तिलहन, दलहन में उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिले। सरकार से NMOP को बढ़ावा देने की मांग है मिशन को पूरा फंड, ताकत के साथ चलाया जाए। इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने पर ज्यादा फोकस हो। किसानों को कम दाम पर बेहतर तकनीक मिले। एग्री कमोडिटी एक्सचेंज को खुलकर काम करने मिले और एग्री कमोडिटी ट्रेडिंग पर बेवजह की लगी रोक हटे।
शुगर सेक्टर की बजट से उम्मीदों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि शुगर सेक्टर को एनर्जी सेक्टर घोषित किया जाए। MSP, एथनॉल की कीमतों को तर्कसंगत बनाया जाए। एथनॉल प्राइसिंग को FRP / SAP से जोड़ा जाए। इससे मिलों की सेहत और किसानों की पेमेंट सुधरेगी।
चावल सेक्टर की बजट से उम्मीदें
एग्री एक्सपर्ट राजेश पहारिया ने कहा कि MSP पर सीधी खरीद धीरे-धीरे कम की जाए। बाजार भाव, MSP का अंतर भावांतर से हो। पैसा सीधे किसान के खाते में पहुंचे। इससे सरकार पर स्टोरेज, खरीद का बोझ कम होगा। वहीं फल, सब्ज़ी, मसाले जैसी हाई-वैल्यू फसलों को बढ़ावा मिलना चाहिए। बीज, खाद और सिंचाई पर टारगेटेड सब्सिडी मिले। किसान की आमदनी बढ़ाने पर सीधा असर हो। इससे एक ही फसल पर किसानों की निर्भरता कम होगी।
ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की मांग है। ऑर्गेनिक खाद, कीटनाशकों पर सब्सिडी मिले। देश-विदेश में बढ़ती ऑर्गेनिक डिमांड का फायदा होगा। ऑर्गेनिक खेती से खेत मिट्टी की सेहत भी बेहतर होगी। एक्सपोर्ट डिमांड वाली फसलों पर फोकस बढ़े। इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड अपनाने में मदद मिले। किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जाए।
Farm to Fork मॉडल के आधार पर खेत से सीधे ग्राहक तक का सिस्टम विकसित हो। कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन मजबूत की जाए। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रा में सुधार की मांग है। पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम हो, किसान को बेहतर दाम मिले। साथ ही खेतों के पास कोल्ड स्टोरेज बनाने की व्यवस्था हो। माल लाने-ले जाने के लिए रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट बढ़े। आधुनिक वेयरहाउसिंग सिस्टम को बढ़ावा मिले।
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