RBI MPC Meeting : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 8 अप्रैल को रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला लिया है। आरबीआई ने दरों में बदलाव पर अपना विराम जारी रखा है। यह फैसला केंद्रीय बैंक के सतर्क रवैये को दर्शाता है। आरबीआई घरेलू महंगाई के तुलनात्मक रूप से स्थिर रुझानों और बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितताओं (इसमें भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं) के बीच संतुलन बैठाता नजर आया है।
वित्त वर्ष 2027 Q2 के लिए महंगाई अनुमान 4.2 %से बढ़ाकर 4.4% किया गया
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए रिटेल महंगाई अनुमान 4.6 फीसदी रखा है। वहीं, वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4 फीसदी किया गया है। इसने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए रिटेल महंगाई अनुमान बिना बदलाव के 4 फीसदी पर रखा है। वहीं,वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.2 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है। इसी तरह वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया गया है।
सरकार के फैसलों से वॉर का असर हुआ सीमित
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमी में चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्लोबल इकोनॉमी में चुनौतिपूर्ण माहौल है। ग्लोबल सप्लाई चेन में मुश्किलें बनी हुई हैं। लेकिन भारतीय इकोनॉमी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। ग्लोबल ग्रोथ में गिरावट का जोखिम बना हुआ है। पश्चिम एशिया संकट से अनिश्चितता का माहौल है। पश्चिम एशिया संकट से अनिश्चितता का माहौल है। हॉर्मुज बाधित होने से ग्रोथ पर असर संभव है। सप्लाई चेन बेहतर करने पर कई कदम उठाए गए हैं। सरकार के फैसलों से वॉर का सीमित असर हुआ है। महंगे क्रूड के कारण महंगाई बढ़ने का जोखिम है। एनर्जी मार्केट बाधित होने से इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। एग्री सेक्टर और सर्विस सेक्टर पर भी इसका असर संभव है। आगे शहरी खपत में मजबूती के संकेत हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार 697 अरब डॉलर पर
RBI गवर्नर ने बताया कि 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697 अरब डॉलर पर था। देश में पर्याप्त विदेशी मुद्रा मौजूद है। 11 महीने तक इंपोर्ट कवर करने का भंडार मौजूद है। एक्सचेंज रेट पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रुपए में स्थिरता के लिए कदम उठाते रहेंगे। सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी पर कदम उठाएंगे। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ संतुलित दिशा में है। MSMEs के लिए कुछ ऑनबोर्डिंग नियम आसान किए जाएंगे। बैंकों से जुड़े मौजूदा मानकों की समीक्षा हो रही है। बैंक बोर्ड से जुड़े मामले तर्कसंगत बनाएंगे।