RBI Policy Expectations: आरबीआई की मौद्रिक नीतियों में इस बार ब्याज दरों में बदलाव की बजाय लिक्विडिटी को मैनेज करने पर अधिक फोकस हो सकता है। ऐसा मानना है बाजार के जानकारों का। उनका मानना है कि महंगाई बढ़ने की रफ्तार नियंत्रित बनी हुई है और ग्रोथ भी स्थिर बना हुआ है तो ब्याज दरों पर तुरंत कुछ करने की जरूरत कम हो गई है। सीएनबीसी टीवी18 के मॉनिटरी पॉलिसी पोल में करीब 90% ने उम्मीद जताई कि इस वित्त वर्ष 2026 के आखिरी और साल 2026 की पहली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है तो सिर्फ कुछ ही यानी महज 10% का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की जा सकती है।
India-US Trade Deal ने और कम की दरों में कटौती की उम्मीदें?
बाजार का मानना है कि इस बार रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश नहीं दिख रही है। नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की पहले जो उम्मीदें थीं, भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी डील फाइनल होने के बाद वह और कम हो गई हैं। इस समझौते को माना रहा है कि शॉर्ट टर्म के लिए राहत देने को लेकर आरबीआई पर दबाव कम किया है।
RBI Policy Expectations: क्या हो सकता है नीतिगत ऐलान में
पोल में शामिल 95% ने संभावना जताई कि रेपो रेट में कटौती नहीं होगी तो करीब 70% का मानना है कि इस पूरे साल ही इसमें कोई बदलाव नहीं होगा और बाकी को उम्मीद है कि इस साल एक बार दरों में कटौती और हो सकती है। किसी ने भी फिलहाल दरों में बढ़ोतरी के आसार नहीं जताए हैं।
बाजार का फोकस लिक्विडिटी पर है। इस साल OMO (ओपन मार्केट ऑपरेशंस) के हाई होने के बावजूद बॉन्ड यील्ड्स बढ़ी हुई है। बाजार के जानकारों ने उम्मीद जताई है कि ओएमओ की अतिरिक्त खरीदारी, लॉन्ग टर्म के VRR (वैरिएभल रेट रेपोज), ऑपरेशन ट्विस्ट या CRR (कैश रिजर्व रेश्यो) में कटौती जैसे रास्तों के जरिए आरबीआई लिक्विडिटी को सपोर्ट कर सकता है। इससे यील्ड को कम करने में मदद मिल सकती है और फंडिंग की स्थिति आसान हो सकती है।
करेंसी पॉलिसी पर बाजार को उम्मीद है कि आरबीआई रुपये को किसी खास लेवल का बचाव करने से बचने के अपने मौजूदा नजरिए को जारी रखेगा। मार्च तक 10-साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड के 6.7-6.8% के आसपास स्थिर होने की उम्मीद है। सर्वे में शामिल 40% का मानना है कि बॉन्ड यील्ड 6.70% रह सकती है तो 40% का मानना है कि यह 6.70%-6.80% के बीच तो 20% का मानना है कि यह 6.80% के ऊपर जा सकती है।
बाजार का मानना है कि भारत और अमेरिकी के बीच कारोबारी डील से रुपये को सपोर्ट मिलेगा। 20% का मानना है मार्च 2026 तक एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये का भाव ₹91-₹91.50 तो 30% का मानना है कि ₹91.50-₹92.00 रह सकता है तो आधे लोगों का मानना है कि यह ₹90 के नीचे आ सकता है।
मैक्रो लेवल पर बात करें तो CPI (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) और GDP डेटा को लेकर अधिक बदलाव की उम्मीद नहीं है। फिलहाल वित्त वर्ष 2026 के लिए आरबीआई का अनुमान 7.3% की जीडीपी ग्रोथ और 2% की सीपीआई का है। इनफ्लेशन को लेकर बाजार का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर 2-2.5% और वित्त वर्ष 2027 में 3.8%-5% के बीच रह सकती है।
ओवरऑल बात करें तो आज की पॉलिसी से न्यूट्रल नजरिए के संकेत की उम्मीद है जिसमें केंद्रीय बैंक आरबीआई का फोकस इनफ्लेशन, ग्रोथ और वैश्विक डेवलपमेंट्स पर नजर रखते हुए लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रह सकता है।