RBI Policy Expectations: आरबीआई की मौद्रिक नीतियों में इस बार ब्याज दरों में बदलाव की बजाय लिक्विडिटी को मैनेज करने पर अधिक फोकस हो सकता है। ऐसा मानना है बाजार के जानकारों का। उनका मानना है कि महंगाई बढ़ने की रफ्तार नियंत्रित बनी हुई है और ग्रोथ भी स्थिर बना हुआ है तो ब्याज दरों पर तुरंत कुछ करने की जरूरत कम हो गई है। सीएनबीसी टीवी18 के मॉनिटरी पॉलिसी पोल में करीब 90% ने उम्मीद जताई कि इस वित्त वर्ष 2026 के आखिरी और साल 2026 की पहली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है तो सिर्फ कुछ ही यानी महज 10% का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की जा सकती है।
