क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल इंडिया की लॉन्ग टर्म सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग 'बीबीबी-' से बढ़ाकर 'बीबीबी' कर दी है। उसने इस बारे में 14 अगस्त को एक बयान जारी किया। इसमें उसने कहा कि इकोनॉमी के अच्छा प्रदर्शन और लगातार फिस्कल कंसॉलिडेशन को देखते हुए इंडिया की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई गई है। उसने इंडिया के आउटलुक को भी स्टेबल बताया है। स्टेबल आउटलुक का मतलब है कि भारत में पॉलिसी के मामले में स्टैबिलिटी है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश से हो रहा है, जिससे लंबी अवधि में ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।
अगले 2-3 सालों में इंडिया की ग्रोथ तेज बनी रहेगी
S&P ने कहा है कि अगले दो से तीन साल में इंडिया की ग्रोथ तेज बनी रहने की उम्मीद है। उसने लंबी अवधि की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाने के अलावा इंडिया की शॉर्ट टर्म रेटिंग को भी 'A-3' से बढ़ाकर 'A-2' कर दी है। लॉन्ग टर्म रेटिंग पर आउटलुक को स्टेबल बनाए रखा है। एसएंडपी की रिपोर्ट में इंडिया के ग्रोथ के स्ट्रॉन्ग ट्रैक रिकॉर्ड का जिक्र है। खासकर कोविड के बाद इंडिया की जीडीपी की ग्रोथ के बारे में बताया गया है। FY22-FY24 के दौरान इंडिया की जीडीपी की औसत ग्रोथ 8.8 फीसदी रही, जो एशिया-पैसेफिक में सबसे ज्यादा है।
भारत दुनिया में सबसे अच्छे प्रदर्शन वाली इकोनॉमी
रेटिंग एजेंसी ने कहा है, "भारत दुनिया में सबसे अच्छे प्रदर्शन वाली इकोनॉमी बनी हुई है। इसने FY22 से FY24 के बीच जीडीपी की तेज ग्रोथ दिखाई है। इस दौरान औसत ग्रोथ 8.8 फीसदी रही। यह एशिया-पैसेफिक में सबसे ज्यादा है। मीडियम टर्म में इस ग्रोथ के जारी रहने की उम्मीद है। अगले तीन साल में जीडीपी की सालाना ग्रोथ 6.8 फीसदी रह सकती है। इससे सरकारी कर्ज और जीडीपी रेशियो पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, जबकि फिस्कल डेफिसिट अब भी ज्यादा है।"
रेटिंग बढ़ने से रुपये में मजबूती बॉन्ड यील्ड में गिरावट
अगले तीन साल में इंडिया की जीडीपी की ग्रोथ सालाना 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि इसमें कंज्यूमर और पब्लिक इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ होगा। इससे FY26 में इंडिया की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। एसएंडपी के इंडिया की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाने के ऐलान के बाद रुपये में मजबूती दिखी। डॉलर के मुकाबले रुपया 87.58 पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड्स की यील्ड 7 बेसिस प्वाइंट्स गिरकर 6.38 फीसदी पर आ गई।
अमेरिकी टैरिफ का नहीं पड़ेगा इंडिया पर ज्यादा असर
एसएंडपी ने अमेरिकी टैरिफ का भारत पर पड़ने वाले असर के बारे में भी बताया है। उसने कहा है कि चूंकि इंडिया की इकोनॉमी घरेलू खपत पर आधारित है, जिससे अमेरिका के ज्यादा टैरिफ लगाने का उस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उसने कहा है, "हमारा मानना है कि इंडिया अमेरिका टैरिफ के असर को संभाल सकता है। इसकी वजह यह है कि इंडियन इकोनॉमी ट्रेड पर निर्भर नहीं है। इकोनॉमी की ग्रोथ में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी घरेलू खपत की है।"