AICTE Biannual Admission Rule 2026: साल में दो बार मिलेगा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और पॉलिटेक्निक में प्रवेश का मौका, एआईसीटीई का बड़ा फैसला

AICTE Biannual Admission Rule 2026: एआईसीटीई ने मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कोर्स में छात्रों को बड़ी राहत प्रदान की है। काउंसिल ने इन पाठ्यक्रमों में साल में दो बार प्रवेश की सुविधा देने का फैसला किया है। इस फैसले से छात्रों के साथ संस्थानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है

अपडेटेड May 05, 2026 पर 11:56 AM
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एआईसीटीई ने साफ किया है कि इंस्टीट्यूट्स के लिए दोनों सत्र में प्रवेश लेना जरूरी नहीं होगा।

AICTE Biannual Admission Rule 2026: तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ा अपडेट है। मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कोर्स में अब साल में दो बार प्रेवेश का मौका मिलेगा। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने देश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था से छात्रों को ज्यादा मौके मिलेंगे और वे अपनी पढ़ाई बिना समय गंवाए आगे बढ़ा सकेंगे।

दो बार मिलेगा प्रवेश का मौका

एआईसीटीई की नई व्यवस्था के तहत अब इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या पॉलीटेक्निक कॉलेजों में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों को दो चरणों में एडमिशन का मौका मिलेगा। पहला सत्र जुलाई-अगस्त के बीच और दूसरा जनवरी-फरवरी के बीच आयोजित किया जाएगा। अगर कोई छात्र किसी कारण से पहले सेशन में एडमिशन नहीं ले पाता है, तो उसे दूसरे सेशन में मौका मिल जाएगा। यह सिस्टम विदेशों की शिक्षा व्यवस्था की तरह बनाया गया है, जहां साल में कई बार प्रवेश का विकल्प होता है।

संस्थानों के लिए जरूरी नहीं दोनों सत्र में शामिल होना

एआईसीटीई ने यह भी साफ किया है कि सभी इंस्टीट्यूट्स के लिए दोनों सत्र में प्रवेश लेना जरूरी नहीं होगा। कॉलेज अपनी सुविधा, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और खाली सीटों के हिसाब से तय कर सकते हैं कि वे एक सत्र में शामिल होंगे या दोनों में। इससे संस्थान पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और वे अपनी क्षमता के अनुसार फैसले ले सकेंगे।

छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका


इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों को पूरा साल इंतजार नहीं करना होगा। छात्र दूसरे सत्र में प्रवेश लेकर उसी साल अपनी पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। इससे उनका समय बचेगा और करियर में देरी नहीं होगी। खासकर उन छात्रों के लिए यह बहुत फायदेमंद होगा, जो किसी कारण से परीक्षा या काउंसलिंग मिस कर देते हैं।

कॉलेजों को भी मिलेगा फायदा

कॉलेजों को भी इस बदलाव का फायदा होगा। इंस्टीट्यूट में सीटें खाली रहने से उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। साल में दो बार प्रवेश होने से इंस्टीट्यूट खाली सीटों को भर सकेंगे।

इंस्टीट्यूट को करनी होगी बेहतर तैयारी

इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कॉलेजों को अपनी तैयारी भी मजबूत करनी होगी। उन्हें फैकल्टी की उपलब्धता, क्लासरूम, लैब और पूरे एकेडमिक कैलेंडर को नए सिस्टम के अनुसार व्यवस्थित करना होगा। तभी यह बदलाव सही तरीके से लागू हो पाएगा।

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