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CBSE 12th Re-Evaluation 2026: संसदीय समिति के सामने 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने उधेड़ी ओएसएम की बखिया, गड़बड़‍ियों पर दी अपनी जांच रिपोर्ट

CBSE 12th Re-Evaluation 2026: सीबीएसई बोर्ड के 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत ने बोर्ड की मूल्‍यांकन व्‍यवस्‍था की कमियां आज संसदीय समिति के सामने व‍िस्‍तार से उजागर की। संसदीय समिति के सामने आज बोर्ड के अध्‍यक्ष खुद भी पेश हुए थे। आइए जानें सार्थक ने क्‍या बताया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 02, 2026 पर 5:17 PM
CBSE 12th Re-Evaluation 2026: संसदीय समिति के सामने 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने उधेड़ी ओएसएम की बखिया, गड़बड़‍ियों पर दी अपनी जांच रिपोर्ट
12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत भी संसदीय समिति के सामने पेश हुए।

CBSE 12th Re-Evaluation 2026: सीबीएसई बोर्ड के लिए इस साल 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का डिजिटल मूल्‍यांकन काफी भारी पड़ गया है। बोर्ड ने शैक्ष‍िक सत्र 2025-26 में 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों की आंसर शीट के मूल्‍यांकन के लिए ऑन स्‍क्रीन मार्किंग (OSM) व्‍यवस्‍था की शुरुआत की थी। लेकिन छात्रों के साथ-साथ सीबीएसई बोर्ड के लिए भी ये व्‍यवस्‍था गले की हड्डी बनती नजर आ रही है।

सीबीएसई में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद आज, संसद भवन अनेक्‍सी में शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों पर बनी संसदीय समिति ने शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और सीबीएसई के अध्‍यक्ष को तलब किया था। ओएसएम पर जारी विवाद के बीच एक अहम घटनाक्रम में 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत भी संसदीय समिति के सामने पेश हुए। रांची के रहने वाले सार्थक ने खुद भी इसी साल सीबीएसई बोर्ड से 12वीं कक्षा की परीक्षा दी है। संसद की स्थायी समिति के सामने पेश हो सार्थक ने ओएसएम व्यवस्था को लेकर अपनी रिसर्च और निष्कर्ष समिति के सामने रखे।

निसर्ग और पत्रकारों के साथ सार्थक ने किया पर्दाफाश

संसदीय समिति के सा‍मने सार्थक ने बताया कि उन्‍होंने बोर्ड का ऑन मार्क पोर्टल हैक करने का कारनामा अकेले नहीं किया है। उन्‍होंने एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी और इस मामले की जांच कर रहे पत्रकारों के साथ मिलकर एक सामूहिक प्रयास के तहत इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया। दरअसल, निसर्ग ने पोर्टल के फ्रंटएंड कोड में एक मास्टर पासवर्ड ढूंढ निकाला था, जिससे बिना ओटीपी (OTP) के ही कॉपियों के अंक बदले जा सकते थे। इस तकनीकी सुरक्षा चूक की जानकारी उन्होंने सरकार को भी दी थी। सार्थक ने स्वयं इस साल परीक्षा दी थी और उनके भी कुछ पन्ने धुंधले थे, जिसके बाद उन्होंने इस व्यवस्था की तह तक जाने की ठानी। संसदीय समिति के सामने और समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में सार्थक ने बताया कि उन्होंने पुराने और नए टेंडर डॉक्यूमेंट की तुलना की और 15 गंभीर गलतियां तलाशीं।

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